न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि कार्रवाई केवल वन भूमि पर लगाए गए सेब के पेड़ों पर ही न करें, बल्कि जहां भी सरकारी भूमि और वन भूमि पर अवैध कब्जा किया गया है, उन सभी कब्जाधारियों पर एक समान कार्रवाई की जाए। 14 जुलाई को हुई सुनवाई में न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई केवल उन मामलों में न की जाए, जहां दोबारा अतिक्रमण का प्रयास किया गया हो। न्यायालय ने भारत के संविधान के अनुच्छेद -14 (कानून के समक्ष समानता) का हवाला देते हुए राज्य को सभी मामलों में समान व्यवहार करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि भूमि पर किए गए अवैध अतिक्रमण को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अदालत ने इस मामले में सरकार को बुधवार को ताजा स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के आदेश दिए।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्यजीव कार्यालय के स्थानांतरण पर सरकार से मांगा जवाब
प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) कार्यालय को शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित करने के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब दायर करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए। मामले की अगली सुनवाई 14 अगस्त को होगी। जनहित याचिका में सरकार की ओर से 14 मई 2025 को जारी अधिसूचना को चुनौती दी गई है। इसके तहत प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) का कार्यालय शिमला से धर्मशाला स्थानांतरित कर दिया गया है। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि इससे पहले भी 13 अक्तूबर 1998 को भी वन्यजीव संरक्षक कार्यालय को शिमला से हमीरपुर स्थानांतरित करने का ऐसा ही प्रयास किया गया था।
हालांकि, 31 जुलाई 2001 को इस आदेश को रद्द कर दिया गया था, जिसके बाद मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव)-सह-मुख्य वन्यजीव वार्डन का कार्यालय शिमला में ही रहा। जबकि मुख्य वन संरक्षक (साझी वन योजना) का कार्यालय शिमला से हमीरपुर स्थानांतरित कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने वन्यजीव सर्कल धर्मशाला के वन संरक्षक की ओर से प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव), शिमला को भेजे गए एक पत्र का भी उल्लेख किया। इस पत्र में बताया गया है कि शिमला में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) कार्यालय की स्वीकृत पदों की क्षमता 40 है और धर्मशाला में वन्यजीव के वन संरक्षक कार्यालय की स्वीकृत क्षमता 33 है। धर्मशाला में उपलब्ध आवास क्षेत्र भी दोनों कार्यालयों को सुचारु रूप से चलाने के लिए आवश्यक क्षमता को पूरा नहीं करता है।