एनएचएआई के प्रबंधक अचल जिंदल ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 30 जून को उप मंडलाधिकारी शिमला ग्रामीण ने उन्हें अपने कार्यालय में सुबह 11:30 बजे बैठक के लिए बुलाया। वह और साइट इंजीनियर योगेश वर्मा दोनों जब एसडीएम ग्रामीण कार्यालय में पहुंचे तो वह वहां मौजूद नहीं थे। उन्हें भट्ठाकुफर आने के लिए कहा गया। जब दोनों मौके पर पहुंचे तो एसडीएम ग्रामीण के साथ मंत्री अनिरुद्ध सिंह और कुछ लोग मौजूद थे।
जिंदल ने पुलिस को बयान दिया कि इस दौरान मंत्री को बहुमंजिला भवन गिरने के बारे में विस्तार से बताया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने उनके साथ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इसके बाद दोनों अधिकारियों को समीप के ही एक निजी व्यक्ति के कमरे में बुलाया। आरोप है कि लोगों की मौजूदगी में मारपीट शुरू की गई। इस दौरान पानी का घड़ा अधिकारी के सिर पर मारा गया, जिससे खून बहने लगा। जब साइट इंजीनियर ने उन्हें बचाने का प्रयास किया तो मारपीट की गई। इसमें दोनों को गंभीर चोटें आईं। मारपीट के दौरान मौजूद रहे एसडीएम ग्रामीण ने भी किसी तरह की मदद नहीं की। इसके बाद दोनों जान बचाकर मौके से भागे और अपनी गाड़ी से आईजीएमसी पहुंचे। पुलिस ने मेडिकल के बाद पंचायती राज मंत्री समेत अन्य लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा, 132, 121(1), 352, 126(2) और 3(5) के तहत एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। एसएसपी शिमला संजीव गांधी ने मामले पर किसी टिप्पणी से इन्कार किया है।
मुख्य सचिव ने दिया जवाब, एफआईआर दर्ज की जा चुकी, जांच जारी
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अध्यक्ष संतोष कुमार यादव ने मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को पत्र लिखा कि इस तरह घटना न केवल राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि फील्ड स्तर पर काम कर रहे एनएचएआई के अधिकारियों के मनोबल को भी प्रभावित करती है। मामले की विस्तृत जांच करवाई जाए और जिम्मेदार सभी लोगों पर कानून के अनुसार मुकदमा चलाया जाए। अन्यथा इससे हिमाचल में काम कर रहे एनएचएआई अधिकारियों के मनोबल पर असर पड़ेगा, जिसका असर राज्य में परियोजनाओं पर पड़ेगा। मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने जवाब दिया कि पहले ही मामले में एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। मामले की जांच की जा रही है।
भट्ठाकुफर की माठू काॅलोनी में बहुमंजिला भवन गिरने के बाद मौके पर गया था। इस दौरान यहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। जब दोनों एनएचएआई के अधिकारी निकले तो पता चला कि इस तरह की घटना हुई है। जिस जगह पर मारपीट हुई वहां पर मैं मौजूद नहीं था-
मंजीत शर्मा, एसडीएम ग्रामीण, शिमला
जयराम ठाकुर बोले- मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करें
वहीं, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया के अधिकारियों की प्रदेश के एक मंत्री प्रशासन और पुलिस की उपस्थिति में मारपीट अत्यंत शर्मनाक और निंदनीय कृत्य है। दो एनएचएआई के अधिकरियों को पुलिस प्रशासन और मंत्री की उपस्थिति में बुलाया गया। मीडिया के लोगों को धमकी देकर उनसे उनके कैमरे बंद करवाए गए और इसके बाद कमरे में बंदकर उनसे मारपीट की गई। इसके बाद मंत्री के समर्थकों द्वारा उन्हें कमरे के बाहर भी उन्हें मारा पीटा गया। उनके ऊपर गमले फेंके गए। मारपीट में दोनों अधिकारी लहूलुहान हो गए। उन दोनों अधिकारियों ने मीडिया के सहयोग से किसी तरीके से भाग कर अपनी जान बचाई। अब वे आईजीएमसी में एडमिट हैं। उनका उपचार चल रहा है। मीडिया के लोगों द्वारा बीच बचाव किए जाने की वजह से उनकी जान बची। सबसे शर्मनाक बात यह है कि मौके पर एसडीएम और पुलिस की मौजूदगी के बाद भी उनके बीच बचाव करना तो दूर उन्हें प्रशासन और पुलिस द्वारा अस्पताल भी नहीं पहुंचाया गया। एनएचएआई के अधिकारियों पर यह हमला अत्यंत घटिया और कानून व्यवस्था का पतन का उदाहरण है। जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री कानून व्यवस्था अपने हाथ में लेने वाले मंत्री के खिलाफ कार्रवाई करें और उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करें। प्रदेश में इस तरीके की अराजकता को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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