उन्होंने कहा कि 2003 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी, उस समय भी सीज फायर हुआ था। बातचीत के जरिये उस समय आतंकवाद काफी कम हो गया था। मनमोहन सिंह सरकार के समय भी बातचीत से ही आतंकवाद को काम किया गया। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला भी कई बार केंद्र सरकार को बोल चुके हैं कि वह पाकिस्तान से बातचीत करे, नहीं तो जम्मू-कश्मीर को इसका परिणाम भुगतना पड़ रहा है। कहा कि वांगचुक पर आरोप हैं कि उनके पाकिस्तान से संबंध हैं। अगर वह कुछ समय पहले पाकिस्तान गए थे और केंद्र को उन पर शक भी है तो उन्हें जाने ही नहीं देना चाहिए था। दूसरी ओर, लद्दाख में जैन जी जैसे प्रदर्शन मामले में कहा कि आगामी दिनों में जम्मू-कश्मीर में भी ऐसे हालात बन सकते हैं क्योंकि मुख्यमंत्री व स्थानीय बड़े नेता उसका समर्थन कर रहे हैं।