परिवार कुछ समय तक किराये के मकान में रहा
विवाह के बाद परिवार कुछ समय तक किराये के मकान में रहा। सितंबर 2024 में सभी सदस्य बहू के नाम पर बने नए मकान में रहने लगे। सास के मुताबिक, नवंबर 2025 में बहू ने उनके साथ झगड़ा किया और एक किराएदार रखकर उन्हें मकान से बाहर कर दिया। इसके बाद सास ने घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12, 17, 18, 19 और 22 के तहत सुरक्षा, संरक्षण और निवास के अधिकार की मांग करते हुए अदालत का रुख किया। बहू की ओर से दलील दी गई कि मकान उसकी निजी आय से बना है और वह उसकी एकमात्र मालिक है। सास केवल लाइसेंसी के रूप में वहां रह रही थी इसलिए सास उनके खिलाफ घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत याचिका दायर करने की हकदार नहीं है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
तीसरे व्यक्ति को किराएदार बना सास को बेदखल करना उचित नहीं
अदालत ने कहा कि साझा गृहस्थी की परिभाषा के लिए यह आवश्यक नहीं है कि संपत्ति पति, सास या पीड़ित महिला के नाम पर हो। यदि कोई महिला घरेलू संबंध के तहत किसी मकान में रह चुकी है, तो वह मकान साझा गृहस्थी माना जा सकता है। अदालत ने यह भी कहा कि जब बहू ने स्वयं स्वीकार किया है कि सास-ससुर उसके साथ उसी मकान में रह रहे थे, तो दोनों के बीच घरेलू संबंध स्थापित होता है। ऐसे में किसी तीसरे व्यक्ति को किराएदार बनाकर सास को अप्रत्यक्ष रूप से बेदखल करना कानूनन उचित नहीं है।