इससे कंप्यूटर शिक्षा के साथ विज्ञान विषयों की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को अधिक विकल्प मिलेंगे। वाणिज्य संकाय में भी गणित को विषय संयोजन में शामिल किया गया है। इससे कॉमर्स के विद्यार्थियों को गणित आधारित आगे की पढ़ाई के लिए विषय चयन का विकल्प मिलेगा। शिक्षा विभाग के अनुसार कुछ वोकेशनल ट्रेड के सीबीएसई में सीधे समान विषय उपलब्ध नहीं हैं। इसी वजह से प्लंबिंग और सिक्योरिटी ट्रेड को आगे जारी रखना मुश्किल माना गया है। इन ट्रेड से जुड़े वोकेशनल ट्रेनरों का भी युक्तीकरण किया जाएगा। दूसरी ओर बैंकिंग, फूड प्रोसेसिंग और टेलीकॉम के समान विषयों के लिए सीबीएसई को प्रस्ताव भेजे गए हैं। सीबीएसई की अंतिम मंजूरी आने तक ये ट्रेड स्कूलों में जारी रहेंगे।
नौवीं में कौशल विकास अनिवार्य, अतिरिक्त विषय अपनी पसंद से
कक्षा नौवीं में कौशल विकास विषय अनिवार्य रहेगा। इसके अलावा विद्यार्थी अपनी रुचि के अनुसार अतिरिक्त कौशल विषय का चयन कर सकेंगे। विभाग का फोकस विद्यार्थियों को पारंपरिक विषयों के साथ कौशल आधारित शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने पर है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इन बदलावों का मौजूदा सत्र में कक्षा 10वीं और 12वीं में पढ़ रहे हिमाचल बोर्ड के विद्यार्थियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। विषय और ट्रेड से जुड़े नए प्रावधान मुख्य रूप से सीबीएसई से संबद्ध सरकारी स्कूलों में विषय चयन और कौशल शिक्षा की व्यवस्था पर लागू होंगे।
शिक्षक सीख रहे पीएम श्री स्कूलों के संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल
हिमाचल प्रदेश में पीएम श्री योजना के तहत विकसित किए जा रहे विद्यालयों में योजनाओं और आधुनिक सुविधाओं का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए स्कूल प्रमुखों की क्षमता बढ़ाई जा रही है। समग्र शिक्षा की ओर से कांगड़ा और चंबा जिलों के पीएम श्री विद्यालयों के स्कूल प्रमुखों के लिए पांच दिवसीय ओरियंटेशन कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इसमें स्कूल स्तर पर योजना के प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन को लेकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
कार्यक्रम में समग्र शिक्षा के स्टेट कोऑर्डिनेटर रविंद्र सिंह, यादविंद्र शर्मा और प्रियंका वर्मा, जिला कांगड़ा डाइट की प्रधानाचार्य डॉ. निशा कटोच और जिला चंबा डाइट की प्रधानाचार्य नम्रता शर्मा सहित शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हुए। ओरियंटेशन कार्यक्रम में स्कूल प्रमुखों को समग्र शिक्षा के विभिन्न इंटरवेंशन, पीएम श्री योजना के वित्तीय मानदंड और स्पर्श के माध्यम से निधियों के प्रबंधन एवं हस्तांतरण की प्रक्रिया समझाई जा रही है। इसके साथ ही विद्यालय विकास, शैक्षिक गुणवत्ता, नवाचार और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल पर भी विशेषज्ञों और संसाधन व्यक्तियों की ओर से मार्गदर्शन दिया जा रहा है।