हिमाचल प्रदेश की शिक्षा यात्रा में शुक्रवार को एक नया अध्याय जुड़ गया है। मुख्यमंत्री सुक्खू ने समग्र शिक्षा के तहत नवाचारी और दूरगामी पहलों की शुरुआत की, जिनका उद्देश्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी, उत्तरदायी और गुणवत्तापूर्ण बनाना है। मुख्यमंत्री ने स्मार्ट उपस्थिति के तहत जिओ-टैग्ड और जिओ-फेंस्ड उपस्थिति प्रणाली की शुरुआत कर शिक्षक व छात्र उपस्थिति को पारदर्शी और तकनीकी रूप से सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त किया। मुख्यमंत्री डैशबोर्ड और जिला डैशबोर्ड का शुभारंभ होने से अब राज्य से लेकर ब्लॉक स्तर तक शिक्षा संबंधी सभी आंकड़े रियल-टाइम में उपलब्ध होंगे। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने बताया कि जिओ-टैग्ड स्मार्ट उपस्थिति प्रणाली को अन्य विभागीय सॉफ्टवेयर से जोड़ा जा रहा है, जिससे उपस्थिति और प्रदर्शन से जुड़े निर्णय डाटा आधारित और सटीक हो सकेंगे।
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री डैशबोर्ड और जिला डैशबोर्ड के माध्यम से राज्य के कोने-कोने से शिक्षा का डाटा मुख्यमंत्री तक पहुंच सकेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक प्रभावी और त्वरित होगी। इस मौके पर कस्तूरबा गांधी बालिका आश्रम की छात्राओं को रक्षाबंधन के लिए दिल्ली रवाना किया गया। ये छात्राएं राष्ट्रपति भवन में रक्षाबंधन पर राखियां बांधेंगी।
शिक्षा क्षेत्र में किए गए बुनियादी बदलाव : रोहित
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि ढाई साल में राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में बुनियादी बदलाव लाए गए हैं। लगभग 5,187 पदों पर भर्तियां की गई हैं। सरकार ने स्कूल लेक्चरर, टीजीटी, जेबीटी शिक्षकों की भर्तियां करने के साथ-साथ कॉलेज शिक्षकों को प्रिंसिपल के तौर पर पदोन्नत किया गया है। अभी और भी शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकार ने स्कूलों के कंसोलिडेशन और संसाधनों के समुचित प्रयोग की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। हिमाचल सरकार शिक्षा पर कुल बजट का लगभग 18 से 20 प्रतिशत व्यय कर रही है।