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हिमाचल विधानसभा सत्र: सीएम सुक्खू बोले- आउटसोर्स कम करने के लिए बनेगी नीति, कौशल विकास स्टाइपंड में हुआ घोटाला

Wed, 26 Aug 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सदन में घोषणा करते हुए कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था को कम करने के लिए सरकार नई नीति तैयार करेगी। साथ ही वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों और भविष्य का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा।
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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश विधानसभा का सत्र मंगलवार को रोजगार के मुद्दे पर गरमाया। कांग्रेस की चार साल में चार लाख को रोजगार देने की चुनावी गारंटी को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरा। आरोप लगाया कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में हजारों पद खाली हैं, लेकिन युवाओं को रोजगार मिलता नजर नहीं आ रहा। प्रश्नकाल के दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद भाजपा ने सरकार पर सदन को गुमराह करने और वास्तविक स्थिति छिपाने का आरोप लगाते हुए वाकआउट कर दिया।

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मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सदन में घोषणा करते हुए कहा कि आउटसोर्स व्यवस्था को कम करने के लिए सरकार नई नीति तैयार करेगी। साथ ही वर्तमान में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों के हितों और भविष्य का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। भर्ती में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए 40 और सामान्य वर्ग के लिए 45 प्रतिशत अंक अनिवार्य किए गए हैं। लिखित परीक्षा और साक्षात्कार के अंकों को जोड़कर मेरिट तैयार की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सरकार में कौशल विकास स्टाइपंड में भी घोटाला हुआ। जहां 15 विद्यार्थियों ने प्रशिक्षण लिया वहां 50 के नाम पर स्टाइपंड जारी हुआ। अब अगर इसकी जांच भी सरकार ने शुरू करवाई तो विपक्ष हल्ला करेगा।

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राज्य सरकार ने स्वरोजगार, उद्यमिता, निजी क्षेत्र और कौशल विकास के माध्यम से युवाओं को नए अवसर उपलब्ध कराए हैं। अग्निवीर योजना में जब युवक नहीं गए तो प्रदेश में 1,350 कांस्टेबल भर्ती किए जबकि एक हजार और पदों पर पुलिस भर्ती हो रही है। जरूरत पड़ने और भर्तियां भी की जाएंगी। राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना के तहत ई-टैक्सी, ई-रिक्शा और इलेक्ट्रिक बसों की खरीद पर सब्सिडी दी जा रही है। अब तक 96 युवाओं को करीब सात करोड़ की सब्सिडी मिल चुकी है। 28 रोजगार मेले और 1,587 कैंपस साक्षात्कार आयोजित कर 23 हजार से अधिक युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर उपलब्ध करवाए गए। एक लाख से अधिक युवाओं को आजीविका परामर्श व मार्गदर्शन, 90 हजार से अधिक को कौशल विकास भत्ता दिया गया।
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भाजपा विधायक जीतराम कटवाल ने प्रश्नकाल में मामला उठाते हुए कहा कि शिक्षा, पुलिस, बिजली बोर्ड, लोक निर्माण और अन्य विभागों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं, फिर भी भर्ती प्रक्रिया अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ रही। यदि लाखों रोजगार दिए गए हैं तो उनका प्रभाव जमीन पर क्यों दिखाई नहीं देता। नेता विपक्ष ने कहा कि सरकार के आंकड़े गुमराह करने वाले हैं। पुलिस में 3,753, जल शक्ति में 517, बिजली बोर्ड में 3,635, लोक निर्माण विभाग में 2,768, उच्च शिक्षा में 3,432, प्राथमिक शिक्षा में 10,583 पद रिक्त हैं। चार साल बीत गए हैं, सरकार भर्तियों का काम कब शुरू करेगी। भाजपा विधायक विक्रम सिंह ने भी सवाल पूछना चाहा। तब विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि एक ही सवाल में 25 मिनट बीत गए हैं। नियम 130 के तहत इस पर चर्चा कर लेना। इस पर बिफरे विपक्ष ने नारेबाजी शुरू कर दी और आठ मिनट पर सदन में हल्ला करने के बाद वाकआउट किया।
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