हिमाचल प्रदेश संयुक्त आउटसोर्स कर्मचारी संघ के संयोजक अश्वनी शर्मा ने कहा कि उन्होंने सरकार के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग 15 से 25 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी पूरी तरह सुरक्षित करने की है। दूसरी मांग सभी विभागों में समान काम का समान वेतन देने की है। उन्होंने कहा कि आज भी कई ऐसे कर्मचारियों को वर्षों की सेवा के बाद महंगाई के इस दौर में मात्र 12,000 रुपये का वेतन मिलता है। ऐसे में कर्मचारियों की मांग है कि समान काम का समान वेतन दिया जाए।
तीसरी मुख्य मांग ड्यूटी के दौरान शहीद या दिव्यांग हुए कर्मचारियों के परिजनों को उचित वेतन देने की है। इसमें खासकर बिजली बोर्ड के कर्मचारी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड के आठ कर्मचारियों की मौत हो चुकी है और उनके परिवारों की वित्तीय स्थिति अत्यंत खराब है। उनकी मांग है कि उन्हें उचित मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। उन्होंने कहा कि उन्हें वर्तमान सरकार से पूरी उम्मीद है कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए नीति बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री सभी निम्न वर्गों के लिए कार्य कर रहे हैं।
इसके साथ ही वह मंच से भी आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए बात कर चुके हैं। सरकार के रुख पर सकारात्मक उम्मीद जताते हुए उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के कार्यों को देखते हुए उन्हें विश्वास है कि सरकार जल्द ही इन मांगों पर नीति बनाएगी। कर्मचारी नेताओं ने दो-टूक शब्दों में कहा कि सरकार दो महीने के भीतर आउटसोर्स कर्मचारियों की मांगें पूरी करे। यदि सरकार दो महीने में कोई ठोस फैसला नहीं लेती है तो आउटसोर्स कर्मचारी प्रदेश भर में जिलावार पदयात्रा करेंगे। इसमें सभी विभागों के आउटसोर्स कर्मचारियों के अलावा उनके परिजन भी शामिल होंगे। इसके बाद शिमला में बड़ी बैठक और बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इसमें कर्मचारी शिमला में महापड़ाव करेंगे।