यह भी प्रावधान किया है कि नगर निगम बनने से नगर परिषद की मौजूदा अवधि पर असर नहीं होगा। यदि किसी नगरपालिका क्षेत्र का कोई भाग कार्यकाल के दौरान नगर निगम क्षेत्र घोषित होता है तो नगर परिषद के सदस्यों की अवधि इसकी समाप्ति या विघटन तक कायम रहेगी। हालांकि, धारा - 24 में नया प्रावधान जोड़ा गया है कि उपायुक्त को अध्यक्ष या उपाध्यक्ष के इस्तीफे को पंद्रह दिन के भीतर स्वीकार करना अनिवार्य होगा। नगर निकायों के सभी अभिलेखों के ऑडिट का काम राज्य लेखा परीक्षा विभाग को दिया गया है।
अधिकांश धाराओं में जुर्माना राशि में भी बढ़ोतरी की गई है। विधेयक में 30 से अधिक धाराओं में संशोधन करते हुए जुर्माना राशि बढ़ाई गई है। पूर्व में जहां जुर्माना 200, 500, 1,000 और 2,000 था, उसे बढ़ाकर 1,000 से 5,000 रुपये तक किया गया है। कई अपराधों में दिन-प्रतिदिन लगने वाले अतिरिक्त जुर्माने को भी 50 या 100 से बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिदिन करने का प्रावधान किया गया है। अवैध निर्माण, अवैध गतिविधियों और नगर निगमों के उल्लंघन पर अब कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी। इसके जुर्माने में बढ़ोतरी की गई है। कई धाराओं में न्यूनतम जुर्माना भी निर्धारित किया गया है। कुछ प्रावधानों में जहां पहले न्यूनतम जुर्माना तय नहीं था, वहां अब न्यूनतम 2,000 और अधिकतम 5,000 तक का प्रावधान जोड़ा गया है। कुछ मामलों में कारावास की अवधि छह माह से बढ़ाकर एक साल की गई है।