सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाकर पात्र विस्थापितों को जमीन का कब्जा देना राजस्थान सरकार की जिम्मेदारी है। खंडपीठ ने पाया कि फेज-2 के तहत जैसलमेर में आवंटित की जा रही जमीन फेज-1 के श्रीगंगानगर क्षेत्र से करीब 600 किलोमीटर दूर है। साथ ही वहां बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। अदालत ने केंद्र सरकार के केंद्रीय सचिव को निर्देश दिया कि वह विस्थापितों के पुनर्वास को कठिन बनाने वाले राजस्थान सरकार के रवैये पर कड़ा संज्ञान लें। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 8 अक्टूबर को होगी। अदालत ने अन्य प्रतिवादियों से भी जवाब तलब किया है।
राजस्थान में 265 मामले अभी भी लंबित
सुनवाई के दौरान सामने आया कि हिमाचल प्रदेश ने 1,003 अदालती मामलों में से 969 का फैसला कर फाइलें राजस्थान को भेज दी हैं, जबकि राजस्थान में अभी 265 मामले लंबित हैं। केंद्र के निर्देश के बावजूद दोनों राज्यों के बीच नियमित मासिक बैठकें भी नहीं हो रही हैं। जनवरी 2025 के बाद केवल एक आवंटन बैठक हुई, जिसमें महज 50 विस्थापितों को जमीन आवंटित की गई। पौंग बांध के निर्माण के लिए वर्ष 1971 में हिमाचल प्रदेश में भूमि अधिग्रहित की गई थी। इससे हजारों परिवार विस्थापित हुए। करीब 16,352 पौंग बांध विस्थापितों के पुनर्वास के लिए राजस्थान के गंगानगर जिले में 2.20 लाख एकड़ भूमि आरक्षित की गई थी।