फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

किसानों के संघर्ष और बलिदान की जीत, जिला में फोड़े पटाखे

विज्ञापन
कृषि कानून वापस लेने की घोषणा के बाद बिझड़ी में पटाखे फोड़ते लोग। - फोटो : Hamirpur-HP
विज्ञापन
हमीरपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुक्रवार को तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा का जिले के किसानों ने स्वागत किया है। जिला के कई किसानों ने इसे आंदोलनरत किसानों के संघर्ष और बलिदान की जीत बताया। कई ने इसे चुनावी स्टंट करार दिया। कई किसानों ने इन कृषि कानूनों की वापसी को किसानों के लिए हानिकारक बताते हुए कानूनों को किसानों के हित में बताया है।
विज्ञापन

जिले में कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा होने के बाद पटाखे भी फोड़े गए। बिझड़ी में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर जश्न मनाया। कांग्रेसियों ने इसे किसानों के संघर्ष की जीत बताया है। किसानों की मांग है कि यह कानून वापस होने के साथ-साथ एमएसपी पर भी गारंटी कानून बनाया जाए ताकि किसानों को उनकी फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य मिल सके। किसानों से यह भी मांग की है कि जो किसान, बागवान आंदोलन करते हुए शहीद हुए हैं उनको केंद्र सरकार मुआवजा और उनके परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दे।
सरकार और भाजपाई माफी मांगें : अजय
जिला किसान कांग्रेस के अध्यक्ष अजय शर्मा ने कहा कि यह किसानों, बागवानों की जीत है। कांग्रेस ने अलग-अलग मंचों से इन कानूनों को वापस लेने के लिए मांग की और ज्ञापन दिए। इसके फलस्वरूप केंद्र की सरकार को यह कानून वापस लेने पड़े। केंद्र की मोदी सरकार और भाजपा प्रवक्ताओं को देश के किसानों-बागवानों से माफी मांगनी चाहिए।
विज्ञापन

लोकतंत्र में मनमर्जी से नहीं बनते हैं कानून : राकेश
पूर्व सैनिक और किसान राकेश कुमार ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा अब जिस तरह से किसान विरोधी निर्णय को वापस लिया है वह बहुत ही पहले ले लेना चाहिए था। भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। यहां पर कोई भी अपनी मनमर्जी से कानून नहीं बना सकता है। जिस तरह से किसानों ने लोकतांत्रिक तरीके से इतने लंबे समय तक सड़कों पर विरोध जताया उसके चलते केंद्र सरकार द्वारा भी किसानों की बातें ठीक लगी है।
एमएसपी गारंटी कानून बने : दीप
दीप चंद ने कहा कि इस आंदोलन के दौरान सात सौ से अधिक किसानों ने जान गंवाई है। सरकार इन किसानों के एक-एक परिवार सदस्य को नौकरी और उचित मुआवजा दे। उन्होंने कहा कि एमएसपी गारंटी कानून बनने से किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलेगा। इसलिए किसानों की अब सरकार से यह मांग है।
किसानों के हित में थे कानून : मोहिंद्र
जोलसप्पड़ के मोहिंद्र सिंह ने कहा कि यह कानून किसानों के हित में थे लेकिन उनको यह पसंद नहीं आए। इसके चलते वे लंबे समय तक घर से दूर जाकर सिंघु बॉर्डर पर संघर्षरत रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के फैसले का वे स्वागत करते हैं। अगर किसानों को यह कानून पसंद नहीं हैं तो प्रधानमंत्री ने इन्हें वापस लेने की घोषणा कर उनके हित में ही कुछ सोचा होगा।
अब घर लौटें किसान : राजीव
रंगस के राजीव कुमार ने कहा कि प्रदेश के अधिकतर भाग में खेती इतने बड़े स्तर पर नहीं होती है कि इन कृषि कानूनों का असर यहां कि किसानों को पड़ता। बागवानों को इसका फर्क था। लेकिन किसानों के संघर्ष के चलते अब तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा प्रधानमंत्री ने की है। अब किसान अपने घर लौटें संघर्ष को समाप्त करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें