मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में फर्श पर लेटी गर्भवती और तीमारदार।
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हमीरपुर। सूबे के सरकारी अस्पतालों में बेहतरीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावों का सच धरातल में कुछ और ही है। इसे जिले के सबसे बड़े डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में देखा जा सकता है। इस अस्पताल के स्त्री रोग विभाग के वार्डों में एक बिस्तर पर दो-दो महिला मरीज दाखिल हैं। अस्पताल के गायनी वार्ड फुल हो गए हैं। नए आने वाले मरीजों और गर्भवतियों को वार्डों के भीतर जगह नहीं मिल रही है। ऐसे में यह मरीज और गर्भवतियां गैलरी में फर्श पर आसन लगाने को मजबूर हैं। वार्डों के बाहर गैलरी में दर्द से कराह रही गर्भवतियां देखने को मिल रही हैं। तीमारदार अस्पताल के कर्मचारियों से बिस्तर उपलब्ध करवाने की गुहार लगाते दिख रहे हैं।
रविवार को भी अस्पताल पहुंचे तीमारदारों जगदीश कुमार, सुरेंद्र भारद्वाज व विनोद शर्मा ने कहा कि अस्पताल आने पर उनके मरीजों को दाखिल होने के लिए तो कह दिया, लेकिन वार्डों में बिस्तर नहीं मिले। मजबूरन उन्हें वार्डों के बाहर शीट बिछाकर अपने मरीजों को फर्श पर लेटाना पड़ा। कर्मचारियों से भी इन्हें बिस्तर दिलाने की मिन्नतें करनी पड़ी, लेकिन शाम तक भी बिस्तर नहीं मिले। ऐसे में इन लोगों ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर रोष जताया है।
लोगों की मांग है कि अगर स्त्री रोग वार्डों में भीड़ रहती है तो अस्पताल प्रबंधन को आपातकालीन कक्ष के साथ बने नए वार्डों में अस्थायी व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि मरीजों व खासकर गर्भवतियों को परेशानी न झेलनी पड़े। इस संबंध में एमएस डॉ. रमेश चौहान ने कहा कि मामला ध्यान में आया है। छुट्टी होने के चलते समस्या आई है। सोमवार को कई मरीज डिस्चार्ज होंगे।