बड़सर (हमीरपुर)। शिक्षा में गुणवत्ता लाने के लिए अगर नई शिक्षा नीति में सफलता हासिल करनी है तो शिक्षकों की भर्ती पदोन्नति प्रक्रिया को गुणात्मक बनाया जाए। वर्तमान में प्रवक्ता स्कूल न्यू कला संकाय में सभी संकाय के शिक्षक प्रमोट हो जाते हैं और गुणात्मक शिक्षा का सपना चकनाचूर हो जाता है। ऐसे में गुणात्मक शिक्षा के लिए कला संकाय में केवल टीजीटी कला शिक्षकों को प्रमोट किया जाए। देश के 22 राज्यों में पीजीटी कला संकाय में टीजीटी कला को ही प्रमोट किया जा रहा है, क्योंकि जिस टीजीटी शिक्षक ने इंटरमीडिएट से लेकर स्नातक और बीएड में एक भी दिन कला संकाय के विषय न पढ़े हैं और न पढ़ाए हैं, उनको सीधे प्रवक्ता प्रमोट किया जाना गुणात्मक शिक्षा के लिए हानिकारक है। ऐसे में जिस विषय में न्यूनतम तीन से पांच वर्ष शिक्षण अनुभव बतौर टीजीटी अनिवार्य किया जाए।
यह मांग करते हुए टीजीटी कला संघ प्रदेश महासचिव विजय हीर ने कहा कि शिक्षा विभाग में टीजीटी कला संकाय के लिए तय प्रमोशन के पदों पर जो पदोन्नति सूचियां जारी हो रही हैं, उनमें टीजीटी कला नाममात्र ही हैं। शेष संकायों के शिक्षक उन पदों पर प्रमोट हो रहे हैं। 43 फीसदी प्रवक्ता स्कूल न्यू के पदों पर टीजीटी कला के लिए पदोन्नति के अवसर भर्ती पदोन्नति नियमों के तहत देय नहीं है और शेष 57 फीसदी प्रवक्ता कला संकाय के पद के लिए टीजीटी मेडिकल, नॉन-मेडिकल और कॉमर्स वाले भी पात्र हैं।
जिसके चलते टीजीटी कला को 15 से 20 फीसदी पदों पर ही प्रमोशन मिल रही है। संघ के कांगड़ा जिला के अध्यक्ष संजय चौधरी ने कहा कि शिक्षा विभाग में टीजीटी कला शिक्षक पदोन्नति के लिए तरस रहे हैं और टीजीटी कला शिक्षकों को मिडल स्कूलों में हेडमास्टर बनाने, सामाजिक अध्ययन पर्यवेक्षक बनाने, हेडमास्टर में अधिकतम कोटा देने, सीधे पदोन्नति के लिए व्यवस्था करने के बारे में गंभीरता से कार्य प्रदेश सरकार को करना चाहिए।