हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में शव का पोस्टमार्टम करवाने के लिए चिकित्सक का इंतजार करते परिजन व ग्रामी?
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हमीरपुर। बीस वर्षीय बेटे के शव के पोस्टमार्टम के लिए परिजन दिनभर मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में भटकते रहे, लेकिन दोपहर बाद तक यहां पोस्टमार्टम नहीं हुआ। आखिर में मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने शव को टांडा मेडिकल कॉलेज ले जाने के लिए कह दिया। जिसके चलते परिजनों को सर्दी के मौसम में कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं, घर पर शव के अंतिम संस्कार की सारी तैयारियां कर रखी थीं।
जिले के सबसे बड़े अस्पताल मेडिकल कॉलेज हमीरपुर में शव का पोस्टमार्टम न होने पर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। अस्पताल में महज एक ही फोरेसिंक एक्सपर्ट है और वह भी छुट्टी पर है। इस कारण अस्पताल में शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। इस पर गुस्साए परिजनों ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर रोष व्यक्त किया। चकडाढ गांव के युवक मंजीत कुमार (20) पुत्र कमलेश 11 अक्तूबर को लठियानी में सड़क दुर्घटना में गंभीर घायल हो गया था।
इसके बाद वह कोमा में था, लेकिन वीरवार तड़के उसकी मौत हो गई। मृतक के मामा छोटू राम ने बताया कि शव को करीब 11 बजे पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज हमीरपुर लाया गया, लेकिन यहां पर उसका पोस्टमार्टम नहीं हुआ। करीब तीन बजे चिकित्सक आया और शव को टांडा ले जाने के लिए कहा। इस कारण परिजनों व ग्रामीणों को परेशानी झेलनी पड़ी। दिनभर परिजन अस्पताल के शव गृह के पास भटकते रहे, लेकिन शव का पोस्टमार्टम नहीं हो पाया। इस संबंध में मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल हमीरपुर के कार्यकारी एमएस डॉ. अनिल वर्मा ने बताया कि पुलिस ने पंचनामा सवा दो बजे दिया। इसके बाद चिकित्सकों ने शव की जांच कर टांडा रेफर किया, क्योंकि मेडिकल कॉलेज हमीरपुर का फोरेंसिक एक्सपर्ट छुट्टी पर चल रहा है। अस्पताल के चिकित्सकों की तरफ से कोई देरी नहीं हुई।