हमीरपुर। सरकारी स्कूलों मेें बच्चों की प्रवेश प्रक्रिया चली हुई है। प्रवेश लेने की अवधि बढ़ाने के लिए स्कूल प्रशासन अनेकों प्रयास कर रहा है। कोरोना काल में जो विद्यार्थी निजी स्कूल छोड़ सरकारी स्कूल में प्रवेश लेना चाहते थे, उन्हें आधार कार्ड व अन्य प्रमाण पत्रों के आधार पर प्रवेश दिया गया। उस समय विद्यालय छोड़ने का प्रमाणपत्र न होने के कारण अभिभावकों व विद्यार्थियों को सुविधा दी गई थी कि अन्य दस्तावेजों पर ही प्रवेश करवा लें। जिस पर कई अभिभावकों ने निजी स्कूल छोड़ सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों का दाखिला करवाया। अब शिक्षा विभाग ने अभिभावकों को विद्यालय छोड़ने का प्रमाण पत्र जमा करवाने के आदेश दिए हैं।
शिक्षा विभाग के इस नए फरमान पर अभिभावक भड़क उठे हैं। अभिभावकों युद्धवीर, सुनील कुमार, विवेक कुमार, नरेश, किरण कुमार, अनिल, जीवन आदि ने कहा कि कोरोना काल में आधार कार्ड से ही सरकारी स्कूलों में बच्चों का प्रवेश करवाया। अब निजी स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र मांगा जा रहा है। जबकि प्रवेश लेते समय यह छूट दी गई थी। अप्रैल माह में बच्चों ने प्रवेश लिया है। इस पर उन्होंने निजी स्कूलों से यह प्रमाण पत्र नहीं लिया। अब कई माह बाद निजी स्कूलों में विद्यालय छोड़ने का प्रमाण पत्र लेने जा रहे हैं तो निजी स्कूल प्रबंधक उनसे शुल्क की मांग कर रहे हैं। कोरोना काल में ऐसे ही आर्थिक हालात खराब हो गए हैं। ऐसे में यह अतिरिक्त भार उठाना पड़ेगा।
इस मामले में उच्च शिक्षा विभाग के उपनिदेशक दिलबरजीत चंद्र ने कहा कि किसी भी विद्यार्थी का प्रवेश बिना विद्यालय छोड़ने के प्रमाण पत्र के मान्य नहीं होता है। विद्यार्थियों को निजी स्कूलों से नाम कटवाने पड़ते हैं और प्रमाण पत्र सरकारी स्कूलों में जमा करवाने पड़ते हैं। अभिभावकों को प्रवेश प्रक्रिया के दौरान भी जानकारी दी गई थी। स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जमा करवाना ही पड़ता है।