ताल (हमीरपुर)। टीजीटी शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता के दस्तावेजों की जांच के लिए विजिलेंस के आह्वान पर शिक्षा विभाग हरकत में आया है। शिक्षक इस वेरिफिकेशन के लिए राजी तो हैं मगर इस बारे में बजट का प्रावधान करने की मांग कर रहे हैं। टीजीटी शिक्षकों की यह फरियाद हिमाचल प्रदेश राजकीय टीजीटी कला संघ ने प्रदेश मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव सहित एडीजी विजिलेंस को भेजी थी। इस पर मुख्य सचिव राम सुभग ने कार्रवाई करते हुए संघ की अपील को शिक्षा सचिव सहित निदेशक उच्च शिक्षा को भेजकर आगामी कार्रवाई के लिए आदेश दिए हैं।
संघ के प्रदेश महासचिव विजय हीर ने कहा कि जिन शिक्षकों की डिग्री वेरिफिकेशन आज तक एक बार भी नहीं हुई है, उनकी डिग्री वेरिफिकेशन के लिए स्कूलों को एसओई-20 अन्य चार्ज शीर्षक के तहत अदायगी करने का प्रावधान है। मगर यहां शिक्षकों को डिग्री वेरिफिकेशन के लिए स्वयं फीस भरने के लिए कहा जा रहा है।
ऐसे में जिन नियुक्त और प्रमोट शिक्षकों की शैक्षिक योग्यता दस्तावेजों की जांच नियुक्ति, नियमितीकरण और वर्ष 2014 से 2020 में हो चुकी है, उनकी वेरिफिकेशन करने के लिए 3,200 से 5,200 रुपये प्रति शिक्षक फीस लेना तर्कसंगत नहीं है। डिग्री वेरिफिकेशन की सर्विस बुक में प्रविष्टि करने की अपील भी संघ ने शिक्षा विभाग से की है ताकि बार-बार शिक्षकों को अपनी मार्कशीट्स वेरिफिकेशन के लिए न भेजनी पड़ें। संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुरेश कौशल ने शिक्षा विभाग से अपील की है कि विजिलेंस को जिन शिक्षकों की फर्जी डिग्री की शिकायत मिली है, प्राथमिक रूप से उन शिक्षकों की डिग्री ही जांची जाए और अगर विजिलेंस जांच में सब शिक्षकों की डिग्री जांची जानी है तो विजिलेंस जांच निशुल्क होनी चाहिए।
टीजीटी से प्रवक्ता पदोन्नति ठंडे बस्ते में
टीजीटी से प्रवक्ता पदोन्नति की प्रक्रिया सुस्त गति से चलने से टीजीटी कला संघ नाराज है। संघ का कहना है कि टीजीटी शिक्षकों को प्रवक्ता पदोन्नति अति शीघ्र दी जानी चाहिए। तबादलों पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद अब शिक्षा निदेशालय को शीघ्र डीपीसी करनी चाहिए, ताकि पात्र शिक्षक प्रमोट हो सकें।