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प्रधानमंत्री मोदी ने किया धौलासिद्ध पावर प्रोजेक्ट का शिलान्यास

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PM Modi lays foundation stone of Dhaulasiddha Power Project
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हमीरपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को मंडी से एसजेवीएन के धौलासिद्ध पावर प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया। सुजानपुर के चौगान और ब्यास नदी के किनारे प्रोजेक्ट साइट पर दो बड़ी एलईडी स्क्रीन लगाकर बिजली प्रोजेक्ट के शिलान्यास का लाइव प्रसारण हुआ। हमीरपुर जिले की ब्यास नदी पर 66 मेगावाट क्षमता का यह पावर प्रोजेक्ट बन रहा है। इस प्रोजेक्ट के निर्माण पर 690 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वर्तमान में प्रोजेक्ट प्रस्तावित स्थल तक सड़क का निर्माण हो चुका है। 253 मीटर लंबी सुरंग के जरिये ब्यास नदी के पानी को दूसरी जगह डायवर्ट किया जा रहा है, ताकि नदी के सूखने के बाद यहां पर डैम का निर्माण किया जा सके।
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सनोटू गांव में पावर हाउस बनेगा। यहां से 18 किलोमीटर लंबी ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी। सुजानपुर में इसे पावर ग्रिड के साथ जोड़ा जाएगा। प्रोजेक्ट निर्माण के लिए 328 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है। जिसमें से 186 हेक्टेयर निजी भूमि, 57 हेक्टेयर वन भूमि और 85 हेक्टेयर सरकारी शामलात भूमि है। वन और शामलात भूमि के अधिग्रहण के लिए सैद्धांतिक मंजूरी सरकार से मिल चुकी है। जबकि, 4500 कनाल निजी भूमि में से 3500 कनाल भूमि का अधिग्रहण हो चुका है। जबकि, शेष एक हजार कनाल भूमि के अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है। इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य के चलते क्षेत्र की 19 ग्राम पंचायतों के 40 गांव प्रभावित हो रहे हैं। जिसमें से रिहायशी आबादी में महज तीन परिवार ही हैं। जबकि शेष भूमि खाली पड़ी है।
बाक्स:
धौलासिद्ध प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य का शुभारंभ हमीरपुर और कांगड़ा के लिए खुशी का विषय: धूमल
हमीरपुर। वरिष्ठ भाजपा नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि धौलासिद्ध जल विद्युत परियोजना के निर्माण कार्य का शुभारंभ हमीरपुर एवं कांगड़ा जिले के लिए प्रसन्नता का विषय है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंडी रैली के दौरान धौलासिद्ध जल विद्युत परियोजना के निर्माण कार्य का ऑनलाइन शुभारंभ किया।
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धूमल ने कहा कि हालांकि धौलासिद्ध जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य वर्ष 2002 में ही शुरू हो जाना चाहिए था, क्योंकि एक निजी कंपनी को उस समय उनकी सरकार में यह कार्य अलॉट किया गया था। लेकिन, प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद इस निर्माण कार्य के अलॉटमेंट रद्द कर दी गई। फिर यह मामला आर्बिट्रेशन में चला गया और वर्षों तक यह निर्माण कार्य लटका रहा। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2007 में हम फिर से प्रदेश में सत्ता में आए और हमने धौलासिद्ध जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य एसजेवीएनएल को अलॉट कर दिया। उस समय केंद्र में यूपीए की सरकार थी। केंद्रीय मंत्री जब-जब इस परियोजना का शिलान्यास करने के लिए हिमाचल प्रदेश आने को तैयार होते थे, तब तब प्रदेश के कांग्रेस के नेता, जो उस समय केंद्र में प्रभावशाली पदों पर बैठे हुए थे, इस परियोजना का विरोध कर देते थे। इस वजह से इस जल विद्युत परियोजना का निर्माण कार्य वर्षों तक लटकता रहा।
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