अब इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना के रुपये पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) सॉफ्टवेयर से सीखे खाते में आएंगे। बाल विकास विभाग के लिए आधुनिक सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है। इसी माह से इसे प्रयोग में लाया जाएगा। कर्मचारियों को सॉफ्टवेयर का प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया गया है। प्रशिक्षित कर्मचारी अब पीएफएमएस सॉफ्टवेयर से योजना के रुपये धात्री और गर्भवती महिलाओं के खाते में डालेंगे। सॉफ्टवेयर का लिंक सभी बैंकों से किया गया है जिससे योजना के रुपये सीधे लाभार्थी के खाते में पहुंच सकें।
पहले डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) सिस्टम से योजना के रुपये खाते में डाले जाते थे। पीएफएमएस से सरल तरीके से रुपये लाभार्थी के बैंक खाते में पहुंचेंगे। साथ ही अधार कार्ड की अनिवार्यता को भी खत्म किया गया है। लाभार्थी को अकाउंट नंबर का ब्योरा देने पर उसके खाते में योजना के रुपये पहुंच जाएंगे। केंद्र सरकार से जिला स्तर पर योजना का बजट जारी हुआ है। हमीरपुर के लिए 3,80,12,500 रुपये का बजट मिला है। इसमें सामान्य वर्ग के लिए 2,65,60,500 और आरक्षित वर्ग के लिए 1,64,52000 का बजट मिला है। 2013-2015 तक की धात्री एवं गर्भवती महिलाओं के खाते में रुपये डाले जाएंगे। जिला की करीब साढ़े छह हजार महिलाओं के खाते में रुपये डाले जाएंगे। इसी माह महिलाओं के खाते में योजना के रुपये पहुंचना शुरू हो जाएंगे।
जिला को इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना के लिए 3.80 करोड़ का बजट मिला है। पीएफएमएस से रुपये लाभार्थी के बैंक खाते में डाले जाएंगे। धात्री एवं गर्भवती महिलाओं के बैंक खाते में रुपये डाले जाएंगे।
- बलवीर सिंह बिरला, कार्यकारी जिला कार्यक्रम अधिकारी