हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश तकनीकी विश्वविद्यालय हमीरपुर में दस दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का वीरवार को समापन हो गया। इसमें तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. शशि कुमार धीमान ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की। जबकि, संस्कृत भारती के अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख डॉ. नंद कुमार मुख्य वक्ता रहे। समारोह की अध्यक्षता तकनीकी विश्वविद्यालय के कुलसचिव अनुपम ठाकुर ने की। मुख्य वक्ता ने कहा कि ब्रिटिशों के भारत आगमन से पूर्व यहां लगभग डेढ़ लाख गुरुकुल थे। संपूर्ण शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल पद्धति पर आधारित थी। अंग्रेजों ने उस महान ज्ञान परंपरा को तहस नहस कर शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी भाषा कर दिया और भारतीयों की मानसिकता को गुलाम बनाने के लिए तथ्यहीन मिथक तर्क गड़े गए।
इसी वजह से ही आज भारत की शिक्षा व्यवस्था प्रभावित है। अब नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लोगों को भारत के मूल से जोड़ने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी। आज आवश्यकता है कि भारत का युवा वर्ग संस्कृत भाषा का अध्ययन कर आधुनिक विज्ञान एवं भारतीय विज्ञान का समन्वय कर एक नई विज्ञान पद्धति का आविष्कार करे, जिससे भारत फिर विश्व गुरु बन सके। कुलपति प्रो. शशि कुमार धीमान ने कहा कि संस्कृत न केवल भाषा है अपितु सभी आधुनिक विषयों के मूल तत्व उसके सूत्र रूप में निहित हैं।
भारत की संस्कृति की पहचान संस्कृत भाषा से है। वर्तमान पीढ़ी को संस्कृत भाषा को बढ़ावा देने के लिए आगे आना चाहिए, जिससे एक बार फिर भारत की संस्कृति पूरे विश्व में विख्यात हो सके। कुलपति ने संस्कृत संभाषण शिविर में भाग लेने वाले सदस्यों के अनुभव कथनों को सुनकर और लघु नाटक की प्रस्तुति देखकर उनकी प्रशंसा की। तकनीकी विश्वविद्यालय ने राज्यपाल सचिवालय से आए निर्देश पर इस दस दिवसीय संस्कृत संभाषण शिविर का आयोजन किया है। इससे पूर्व कुलपति ने शिविर में लगाई प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया। इस मौके पर अधिष्ठाता योजना व विकास प्रो. जयदेव, संस्कृत संभाषण शिविर के शिक्षक डॉ. प्रदीप कुमार सहित प्राध्यापक, कर्मचारी और विद्यार्थी उपस्थित रहे।