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Hamirpur (Himachal) News: निजी अस्पतालों में भर्ती किडनी मरीजों से हिमकेयर का सहारा छूटा

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सरकारी अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा की क्षमता है महज 12
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जिलाभर में प्रतिदिन औसतन 50 मरीजों का हो रहा डायलिसिस
निजी अस्पतालों में हिमकेयर कार्ड पर हो जाती थी डायलिसिस
संवाद न्यूज एजेंसी

हमीरपुर। निजी अस्पतालों में हिमकेयर कार्ड से उपचार की सुविधा बंद हो गई है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज हमीरपुर पर और भार बढ़ गया है। वहीं, डायलिसिस करवाने वाले किडनी रोगियों के तीमारदारों की चिंता भी बढ़ गई है। जिला हमीरपुर में चार ऐसे निजी अस्पताल हैं जहां पर हिमकेयर कार्ड पर डायलिसिस होता था। अब बंद कर दिया है। ऐसे में मरीज डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर पहुंच रहे हैं लेकिन यहां डायलिसिस यूनिट में एक दिन में महज 12 मरीजों का ही डायलिसिस संभव है। जबकि, जिला हमीरपुर में निजी अस्पतालों समेत औसतन 50 लोगों का डायलिसिस प्रतिदिन होता है। ऐसे में इन मरीजों के लिए परेशानी खड़ी हो गई है।


डायलिसिस हर जिले के हर अस्पताल में होती भी नहीं है। सिविल अस्पतालों में यह सुविधा नहीं है। इन मरीजों के तीमारदारों का कहना है कि अब कहां जाएं और क्या करें, कुछ समझ नहीं आ रहा। वहीं, गर्भवती महिलाओं को भी कुछ सुविधाएं हिम केयर कार्ड पर निजी अस्पतालों में उपलब्ध करवा दी जाती हैं लेकिन गर्भवती महिलाओं को भी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार ने निजी अस्पतालों में हिम केयर कार्ड की सुविधा बंद कर दी है तथा सरकारी अस्पताल में ही हिम केयर की सुविधा मिलेगी लेकिन सरकारी अस्पतालों में पहले से ही इतने मरीज हैं कि जगह कम है और मरीज अधिक। ऐसे में और बोझ सरकारी अस्पतालों पर पड़ रहा है। इस बारे में डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल अस्पताल हमीरपुर के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अजय ने कहा कि अस्पताल में 12 मरीजों का डायलिसिस प्रतिदिन होता है। मरीजों को हर संभव सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है।
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क्या कहते हैं तीमारदार



- परिवार के सदस्य का हिमकेयर कार्ड पर सरकारी अस्पताल में इलाज करवाया। इससे खर्च में काफी सहायता मिली। जो लोग निजी अस्पतालों में अपना इलाज करवा रहे हैं उन्हें अब परेशानी होगी और सरकारी अस्पताल में और भीड़ होगी।

-सीमा, तीमारदार।



-हिमकेयर कार्ड का लाभ निजी अस्पतालों में कुछ क्षेत्रों में बंद नहीं करना चाहिए। क्योंकि जिन मरीजों को डायलिसिस की आपातकाल में आवश्यकता है वह कहां जाएगा। ऐसे में सरकार को इस बारे सोचना चाहिए। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत निजी अस्पतालों को इसका भुगतान किया जा सकता है।
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-अभिषेक, तीमारदार।



गर्भवती महिलाओं को भी निजी अस्पताल में अल्ट्रसाउंड व इलाज के दौरान हिमकेयर कार्ड का लाभ मिलता था लेकिन अब वह भी बंद हो गया है। ऐसे में इन गर्भवती महिलाओं के बारे में भी प्रदेश सरकार को सोचना चाहिए।

-रजनी, तीमारदार।



कांगड़ा से हमीरपुर में किसी का इलाज करवा रही हूं। यहां पर खासी भीड़ है। अगर और भीड़ होती है तो मरीजों को खासी परेशानी होगी।
रमा, तीमारदार।
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