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हमीरपुर में पहली बार एक मंच पर दिखे कांग्रेस के तीन विधायक, दो पूर्व विधायक

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डॉ. आंबेडकर जयंती पर आयोजित कांग्रेस के कार्यक्रम में मंच पर मौजूद पदाधिकारी। - फोटो : Hamirpur-HP
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हमीरपुर। चुनावी मौसम में हमीरपुर के कांग्रेस नेताओं ने एक-दूसरे के बीच खींची गई सियासी दूरियों को कम करने की कवायद शुरू कर दी है। प्रदेश में नेतृत्व को लेकर छिड़ी जंग के बीच जिला कांग्रेस के पांच बड़े नेता पहली बार एक मंच पर एक साथ नजर आए। वीरवार को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती पर कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग की ओर से बचत भवन हमीरपुर में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में नादौन से कांग्रेस विधायक एवं पूर्व पीसीसी अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू बतौर मुख्यातिथि, जबकि विशिष्टि अतिथि के रूप में सुजानपुर से विधायक राजेंद्र राणा, बड़सर से विधायक इंद्रदत्त लखनपाल ने शिरकत की। पूर्व सीपीएस अनीता वर्मा और पूर्व विधायक कुलदीप पठानिया भी मंच पर विशेष तौर पर उपस्थित रहे।
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सबसे पहले सुबह 11:30 पर विधायक लखनपाल पहुंचे, इसके बाद 11:45 पर राजेंद्र राणा कार्यक्रम में पहुंचे। सवा बारह बजे जैसे ही नादौन के विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू कार्यक्रम में पहुंचे तो उनके समर्थकों ने उनके पक्ष में नारेबाजी शुरू कर दी। सुक्खू को पार्टी का प्रदेश नेता बनाने की मांग उठी। कांग्रेस का नेता कैसा हो सुक्खू भाई जैसा हो, प्रदेश का मुख्यमंत्री कैसा हो सुक्खू भाई जैसा हो नारों से बचत भवन गूंज उठा। जिस दौरान यह नारेबाजी हो रही थी, उस समय सुजानपुर के विधायक राजेंद्र राणा, बड़सर के विधायक लखनपाल, पूर्व सीपीएस अनीता वर्मा, पूर्व विधायक कुलदीप पठानिया और जिला कांग्रेस अध्यक्ष समेत जिला कार्यकारिणी और विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी मंच पर उपस्थित थे। सुक्खू समर्थकों की यह नारेबाजी नई राजनीतिक चर्चा को हवा दे गई। पूर्व में इन कांग्रेस नेताओं के बीच छत्तीस का आंकड़ा रहा है।
बीते साढ़े चार सालों में जिले में पार्टी के कार्यक्रमों में भी एक साथ नहीं दिखे। वीरभद्र सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए भी यह पांचों कभी एक एक मंच पर नजर नहीं आए। पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस को जिस तरह करारी हार मिली है, उसके बाद कांग्रेसियों को एकजुटता में ही समझदारी दिखने लगी है। कार्यक्रम खत्म होने के बाद तीनों विधायक एक कार में सवार होकर होटल हमीर पहुंचे और बंद कमरे में लंबी बातचीत भी की। कांग्रेस नेताओं की यह जुगलबंदी भाजपा में भी खासी चर्चा का विषय बन गई है।
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