हमीरपुर। सरकारी अस्पतालों में प्रसव का ग्राफ बढ़ाने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड करवाने की पर्याप्त सुविधा नहीं मिल रही है। सरकारी अस्पतालों में कहीं रेडियोलाजिस्ट की कमी है तो कहीं अल्ट्रासाउंड के लिए कई दिनों की तिथि मिल रही है। सरकारी अस्पतालों में भीड़ से बचने और समय पर अल्ट्रासाउंड करवाने के लिए गर्भवती महिलाएं निजी अस्पतालों में अल्ट्रासाउंड करवाने को मजबूर हैं।
नतीजतन निजी अस्पतालों में सरकारी की अपेक्षा अधिक संख्या में गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड हो रहे हैं। पिछले एक साल में जिला के निजी अस्पतालों में सरकारी अस्पतालों की तुलना में तीन गुणा गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2024 से दिसम्बर 2024 तक गर्भवती महिलाओं के करीब 25,945 अल्ट्रासाउंड हुए हैं। जिसमें सरकारी अस्पतालों में 6,178 और निजी अस्पतालों में 19,767 अल्ट्रासाउंड हुए हैं। जिला में सात सरकारी और करीब 13 निजी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिल रही है। जहां सरकारी अस्पतालों में निशुल्क अल्ट्रासाउंड की सुविधा मिल रही है, वहीं निजी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं को एक हजार से दो हजार रुपये अल्ट्रासाउंड के लिए देने पड़ते हैं।
-सरकारी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ मरीजों को बेहतर सुविधाएं दी जाती हैं। जनवरी 2024 से दिसंबर 2024 तक सरकारी क्षेत्र में 6,178 और निजी क्षेत्र में 19,767 गर्भवती महिलाओं के अल्ट्रासाउंड हुए हैं।
-प्रवीण चौधरी, सीमएओ हमीरपुर
समाचार : नवीन