बिझड़ी (हमीरपुर)। विकास खंड बिझड़ी की अधिकांश ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवर बनाने की योजना सिरे नहीं चढ़ पाई हैं। प्रदेश सरकार ने गत वर्ष पंचायतों में पानी की किल्लत, पर्यावरण संरक्षण और जंगली जानवरों की सुविधा के लिए अमृत सरोवर बनाने का निर्णय लिया था। इससे सिंचाई सुविधा और जंगलों को आग से बचाने में भी मदद मिलनी थी, लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बाद विकास खंड बिझड़ी की 52 पंचायतों में से केवल एक दर्जन के करीब पंचायतों में ही अमृत सरोवर का कार्य हो पाया है।
इससे साफ प्रतीत होता है कि पंचायतों के कर्मचारियों के साथ-साथ चुने हुए प्रतिनिधि सरकार के आदेशों के प्रति गंभीर होते नहीं दिख रहे हैं। हैरत की बात यह है कि सरकारें तो प्रदेश की पंचायतों में आ रही किल्लत को ध्यान में रखते हुए योजनाएं तैयार करती हैं, लेकिन पंचायत प्रतिनिधियों की ओर से दिलचस्पी न रखने से इन योजनाओं का लाभ लोगों को नहीं मिल पाता। क्षेत्र की कुछेक पंचायतों में भूमि का चयन न होने के चलते सरकार द्वारा चलाई गई यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई है, लेकिन कुछ पंचायतों में भूमि होने के बावजूद भी अमृत सरोवर बनाने की योजना को तवज्जो नहीं दी गई। यही कारण है कि क्षेत्र की पंचायतों में अमृत सरोवर बनाने की योजना धराशायी हो गई है।
खंड विकास अधिकारी बिझड़ी रमेश चंद्र ने बताया कि जिन पंचायतों में भूमि उपलब्ध थी, वहां पर यह कार्य करवा दिए हैं या हो रहे हैं। ब्लाॅक की अन्य पंचायतें जहां यह कार्य नहीं हो पाए, उन्हें सख्त निर्देश दिए गए हैं।