संवाद न्यूज एजेंसी
टौणी देवी (हमीरपुर)। विश्व श्रवण दिवस पर खंड स्वास्थ्य शिक्षक कमल मनकोटिया ने कहा कि 2007 से प्रतिवर्ष तीन मार्च को यह दिवस मनाया जाता है लेकिन इस वर्ष तीन मार्च को पल्स पोलियो अभियान होने के कारण इस दिन को 15 मार्च को मनाया जा रहा है। शुक्रवार को जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन चमनेड़ गांव में प्रधान नीलम कुमारी की अध्यक्षता में किया गया। स्वास्थ्य शिक्षक ने कहा कि भारत में 5 करोड़ से भी अधिक लोग ऐसे हैं, जिन्हें या तो कम सुनाई देता है या बिल्कुल भी सुनाई नहीं देता। इतनी बड़ी जनसंख्या का इस समस्या से पीड़ित होने के बावजूद व्यक्ति विशेष की श्रवण समस्या को समझने और एक्सपर्ट चिकित्सक के पास आने तक पांच से छह वर्ष लग जाते हैं। इस तरह इलाज में देरी की वजह से लोगों में विभिन्न मानसिक बीमारियां अथवा अवसाद उत्पन्न होते हैं।
श्रवण समस्या में बढ़ती उम्र बहरेपन का आम कारण हो सकता है। अक्सर बढ़ती उम्र के साथ कान की नसें कमजोर होने से भी व्यक्ति विशेष बहरेपन का शिकार हो सकता है। कान के मैल को हटाने के लिए रुई के फाहे, ईयर पिक, पेन या उंगलियों का उपयोग करना कई प्रकार से हानिकारक हो सकता है। इससे सुनने की क्षमता में कमी आ सकती है। इस मौके पर प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। इसके बाद विजेताओं को भी सम्मानित किया गया। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से कार्यकर्ता प्रीतम चंद, महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता आशा देवी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं आशा कार्यकर्ता मौजूद रहे।