बाल स्कूल हमीरपुर के मतदान केंद्र पर कार्य करती महिला कर्मचारी। संवाद
दोपहर को कड़ी धूप और बारिश में पोलिंग बूथों पर कम आए मतदाता
पोलिंग बूथों पर बैठने की भी थी व्यवस्था, पानी के लिए स्वयंसेवी रहे तैनात
पहली बार मतदान करने का उत्साह, बुजुर्गों, दिव्यांगों ने लोकतंत्र निर्माण में दिया योगदान
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। विधानसभा क्षेत्र हमीरपुर के तहत बाल स्कूल में बनाया गया बूथ नंबर 21, 22 और 23। समय सुबह 10.45 बजे। मतदाताओं की कतार लगी है। मतदान केंद्र पर तैनात कर्मी भी मतदाताओं की जानकारी और पहचान पत्र जांच कर केंद्र के लिए रवाना रहे हैं। इस बूथ को पर्यावरण संरक्षण थीम पर ग्रीन बूथ बनाया गया। यहां पर महिला चुनाव अधिकारी और कर्मचारी शांतिपूर्ण ढंग से वोटिंग करवा रही हैं। समय 10.49। 84 वर्षीय महिला प्रेमलता अपने परिजनों के साथ मतदान करने पहुंची है।
बुजुर्ग महिला मतदाता के बाद यहां पर पहली बार मतदान करने वाले मतदाता पहुंच रहे हैं। महिला कर्मी मतदाताओं से उनके मोबाइल फोन जमा करवाने और शांतिपूर्ण तरीके से मतदान करने की अपील कर रहे हैं। समय 10.50 बजे। राजकीय केंद्रीय प्राथमिक बाल प्राथमिक पाठशाला हमीरपुर के बूथ नंबर 27 पर मतदाताओं की कतार लगी है। कुछ मतदाता मतदान के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं तो जिन्होंने वोट डाल लिया है वह अपने परिवार के सदस्यों का इंतजार कर रहे हैं। समय 11 बजे। बुजुर्ग दंपती वोट डालकर अपने घर की ओर जा रहे हैं। वह लोगों से मतदान के बारे में चर्चा कर रहे हैं। 11 बजकर 20 मिनट हो गए हैं। यहां पर लोग वोट डालकर अपने घरों की ओर जा रहे हैं। बूथों पर भीड़ भी कम हो रही है।
लोग सुबह साढ़े छह बजे से विभिन्न पोलिंग बूथों पर पहुंच गए हैं। दिन में अधिक धूप हो रही है और गर्मी भी प्रचंड है। करीब 12.30 बजे तक पोलिंग बूथों पर भीड़ कम हो गई। समय- 12.40 बजे। यहां पर मतदान करवाने के लिए मतदान अधिकारी, पुलिस कर्मचारी और अन्य स्टाफ तो है लेकिन एक भी मतदाता यहां पर नहीं है। बारिश के बीच मतदान केंद्रों में एक भी मतदाता मतदान करने नहीं पहुंचा। करीब 12.45 बजे एक युवक वोट डालने आता है। उसके बाद 1.30 बजे के करीब एक बुजुर्ग महिला वोट डालने आती है। अब दो बज गए हैं और आधे घंटे बाद एक और महिला वोट डालने आती है। पोलिंग बूथों पर आशा कार्यकर्ताओं की भी तैनाती की गई थी ताकि किसी को भी कोई दिक्कत हो तो उन्हें तुरंत प्राथमिक उपचार उपलब्ध करवाया जा सके। यहां पर बैठने के लिए कुर्सियों का भी प्रबंध रहा।