हिमाचल सरकार योगगुरु के साथ आउट आफ कोर्ट सेटलमेंट के लिए भी तैयार है। शुक्रवार को शिमला पहुंचे राजस्व मंत्री ठाकुर कौल सिंह ने यह नया आफर बाबा को दिया है। सचिवालय में मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यदि बाबा रामदेव चाहें तो सरकार कोर्ट से बाहर समझौते को तैयार है। राज्य सरकार साधुपुल में पतंजलि योगपीठ की ओर से खर्च की गई धनराशि का मूल्यांकन करवाएगी। रिपोर्ट में जो धनराशि आएगी, सरकार उसे बाबा को लौटा सकती है, यदि वह इसकी इच्छा रखते हों।
गौरतलब है कि इस विवाद पर केस अब हाईकोर्ट में है और कोर्ट ने दोनों पक्षों को यथास्थिति बरकरार रखने को कहा है। अमर उजाला ने सरकार के इस आफर पर बाबा के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण से हरिद्वार में बात की। बालकृष्ण ने कहा कि ऐसा ही करना था तो राजस्व मंत्री जी पहले कहां सोए थे? बुलाकर बात कर लेते या लीज रद करने से पहले नोटिस देते। मसला अब कोर्ट में है। यदि सरकार को लगता है कि कोर्ट से बाहर बात बन सकती है तो मीडिया में बातें करने के बजाए यही बातें लिखित में हमें बताई जाएं। इसके बाद फैसला लेंगे।
साधुपुल की मुहिम अब फेसबुक पर
वहीं, साधुपुल में बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ की लीज बहाल करने की मुहिम अब सोशल साइट फेसबुक पर शुरू होगी। स्थानीय ग्रामीण जहां सरकार के निर्णय के खिलाफ अभियान छेड़ेंगे वहीं प्रदेश और देशवासियों से इस पर समर्थन भी मांगेंगे। साधुपुल की नजदीकी पंचायतों के स्कूली बच्चों से भी 15 से 20 हजार कार्ड लिखवाकर मुख्यमंत्री को भेजे जाएंगे, जिसमें योगपीठ की लीज को जारी करने की मांग की जाएगी।
शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के प्रदेश सह संयोजक रवि मेहता ने बताया कि ग्रामीणों की जल्द ही एक बैठक बुलाई जाएगी जिसमें संघ का गठन किया जाएगा। उसी संघ के बैनर तले ग्रामीण इस मुहिम में जुटेंगे। उन्होंने दावा किया कि साधुपुल क्षेत्र की करीब 12 पंचायतों के 120 गांवों के लोग पतंजलि योगपीठ बनाने का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाबा सरकार से कोर्ट से लडेंगे तथा ग्रामीण प्रदेश के लोगों को जागरूक करने का कार्य करेंगे।