उत्तर-प्रदेश के शासनकाल के समय में जुलाई 1966 में दोनों राज्यों के बीच सीमा के निर्धारण को मुख्य सचिव स्तर पर हुई। बैठक में लिए गए निर्णय के अनुसार उत्तर-प्रदेश और हिमाचल के बीच सीमा क्षेत्र के निर्धारण को सर्वे ऑफ इंडिया (भारतीय सर्वेक्षण विभाग) से सीमांकन कराने पर सहमति बनी थी। सीमांकन की कार्रवाई नहीं हो सकी। उत्तर प्रदेश के समय से लंबित सीमा विवाद का मामला 9 नवंबर 2000 को उत्तर प्रदेश से पृथक हुए उत्तराखंड के गठन के 25 वर्षों बाद भी जस का तस है।
दोनों राज्यों के बीच यमुना और टौंस नदी का करीब 27 किलोमीटर का क्षेत्र साथ लगता है। दोनों नदियों में सर्वाधिक उप खनिज रेत, बजरी व पत्थर प्रचुर मात्रा में रहता है। पांवटा साहिब के यमुना पुल से लेकर डाकपत्थर बैराज और रामपुर मंडी समेत क्षेत्र से लेकर हरियाणा तक सीमा लगती है। इन स्थलों पर अवैध खनन भी होता है।
सिरमौर क्रशर संघ अध्यक्ष मदन मोहन शर्मा ने बताया कि वर्ष 2024-25 में खनन से रिकॉर्ड 54.86 करोड़ राजस्व सरकार को मिला है। राज्य सीमांकन व यमुना नदी किनारे खनन सामग्री वाले वाहनों को अलग मार्ग से प्रदेश सरकार को मिलने वाला राजस्व दुगना हो सकता है। अभी केवल राज 9 बजे से सुबह 5 बजे तक खनन समाग्री से भरे वाहन पांवटा में चलते हैं। ढाई दशकों से अधिक समय से भी सीमा विवाद के निपटारे को लेकर उत्तराखंड और हिमाचल की तरफ से गंभीर प्रयास नहीं हो पाए।
जून 2013 में ही एक बार सीमा निर्धारण को दोनों राज्यों के प्रशासनिक अधिकारियों के संयुक्त सर्वे के लिए देहरादून के जिलाधिकारी ने सिरमौर के उपायुक्त को पत्र भेजा था। इसके बाद सर्वे के लिए विकासनगर के उपजिलाधिकारी अशोक पांडेय के नेतृत्व में कमेटी गठित कर दी गई, लेकिन कोई ठोस समाधान ही नहीं निकल सका।