फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

HP High Court: तीन साल सेवा के बाद नर्स को नौकरी से हटाना दमनकारी, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने दिए बहाली के आदेश

Thu, 18 Dec 2025 02:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के 31 अगस्त 2024 के उस आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है, जिसमें स्टाफ नर्स की नियुक्ति को दो साल बाद केवल इस आधार पर वापस ले लिया गया था कि वह संबंधित बैच की पात्रता पूरी नहीं करती। पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता जो पिछले 3 वर्षों से स्टाफ नर्स के पद पर अपनी सेवाएं दे रही है, इस मोड़ पर उसे नौकरी से निकालना बेहद कठोर और दमनकारी होगा। हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के 31 अगस्त 2024 के उस आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है, जिसमें स्टाफ नर्स की नियुक्ति को दो साल बाद केवल इस आधार पर वापस ले लिया गया था कि वह संबंधित बैच की पात्रता पूरी नहीं करती। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता की सेवाओं को नियमित करने के लिए नीति के अनुसार विचार किया जाए, क्योंकि उनके साथ नियुक्त हुए अन्य स्टाफ नर्सों को पहले ही नियमित किया जा चुका है।

विज्ञापन


न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि चयन समिति की गलती का खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगतना चाहिए, खासकर जब उसमें कर्मचारी की ओर से कोई धोखाधड़ी या गलत जानकारी न दी गई हो। यह मामला वर्ष 2022 का है, जब हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने स्टाफ नर्सों के 89 पदों को बैच आधार पर भरने के लिए काउंसलिंग करवाई। याचिकाकर्ता ने ओबीसी बीपीएल श्रेणी में आवेदन किया। इसमें याचिकाकर्ता का चयन हुआ।

विज्ञापन

मार्च 2022 में उन्होंने डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय आयुर्विज्ञान चिकित्सालय टांडा में कार्यभार संभाला। दो साल की सेवा के बाद मार्च 2024 में विभाग ने अचानक उनकी नियुक्ति रद्द करने का आदेश जारी किया। विभाग का तर्क था कि यह पद 2011 बैच के लिए आरक्षित था, जबकि याचिकाकर्ता ने बीएससी नर्सिंग दिसंबर 2014 में पारित की थी। कोर्ट ने पाया कि उस समय संबंधित बैच का कोई अन्य उम्मीदवार उपलब्ध नहीं था। यदि याचिकाकर्ता को हटाया जाता है, तो पद खाली रह जाएगा, जिससे जनता की सेवा प्रभावित होगी। याचिकाकर्ता ने विभाग से कुछ नहीं छिपाया। उसने अपनी डिग्री और प्रमाण पत्र सही जमा किए थे। चयन समिति ने सब जानते हुए भी उसे नियुक्त किया था।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें