हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता जो पिछले 3 वर्षों से स्टाफ नर्स के पद पर अपनी सेवाएं दे रही है, इस मोड़ पर उसे नौकरी से निकालना बेहद कठोर और दमनकारी होगा। हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग के 31 अगस्त 2024 के उस आदेश को पूरी तरह से रद्द कर दिया है, जिसमें स्टाफ नर्स की नियुक्ति को दो साल बाद केवल इस आधार पर वापस ले लिया गया था कि वह संबंधित बैच की पात्रता पूरी नहीं करती। अदालत ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि याचिकाकर्ता की सेवाओं को नियमित करने के लिए नीति के अनुसार विचार किया जाए, क्योंकि उनके साथ नियुक्त हुए अन्य स्टाफ नर्सों को पहले ही नियमित किया जा चुका है।
न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने कहा कि चयन समिति की गलती का खामियाजा कर्मचारी को नहीं भुगतना चाहिए, खासकर जब उसमें कर्मचारी की ओर से कोई धोखाधड़ी या गलत जानकारी न दी गई हो। यह मामला वर्ष 2022 का है, जब हिमाचल प्रदेश स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने स्टाफ नर्सों के 89 पदों को बैच आधार पर भरने के लिए काउंसलिंग करवाई। याचिकाकर्ता ने ओबीसी बीपीएल श्रेणी में आवेदन किया। इसमें याचिकाकर्ता का चयन हुआ।