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Himachal News: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग करेगा सहारा योजना की जांच, अपात्र होंगे बाहर

Fri, 10 Jul 2026 05:40 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

जांच के सभी दस्तावेज सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को सौंप दिए गए हैं। इस योजना में ऐसे कई लोगों को शामिल किया गया है, जिन्हें विभागों से पेंशन ले रहे हैं। 
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मुख्यमंत्री सहारा योजना की जांच। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री सहारा योजना की जांच सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को सौंप दी है। पहले यह जांच स्वास्थ्य विभाग कर रहा था। विभाग की ओर से जांच के सभी दस्तावेज सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को सौंप दिए गए हैं। इस योजना में ऐसे कई लोगों को शामिल किया गया है, जिन्हें विभागों से पेंशन ले रहे हैं। ऐसे में योजना में भारी गड़बड़ी होने की आशंका है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से पूर्व में की गई जांच में सामने आया कि ऐसे सैकड़ों लाभार्थी हैं, जो दो जगह से फायदा ले रहे हैं। हिमाचल में कुल लाभार्थियों की संख्या 36 हजार है।

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मुख्यमंत्री सहारा योजना गंभीर बीमारियों से पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को 3,000 रुपये प्रति माह की वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इस योजना में पार्किंसंस, कैंसर, पक्षाघात, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफिलिया और थैलेसीमिया जैसी बीमारियों का इलाज कराने वाले लाभार्थी पात्र हैं। सरकार की ओर से यह राशि इसलिए दी जा रही है, जिससे वह दवाओं का खर्चा उठा सके। उन्हें किसी पर निर्भर न रहना पड़े। जिन अधिकारियों ने लाभार्थियों को प्रमाणपत्र जारी किए हैं। वह भी जांच के दायरे में आएंगे। सरकार का मानना है कि पात्र लाभार्थियों को ही योजना का लाभ मिलना चाहिए। जिन लोगों को सरकारी पेंशन व सामाजिक सुरक्षा पेंशन दी जा रही है, वह सहारा योजना में पात्र नहीं माने जाएंगे।
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लाभार्थियों की रुकी है राशि
स्वास्थ्य विभाग के विशेष सचिव अश्वनी शर्मा ने बताया कि सहारा योजना की जांच सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग को सौंपी गई है। विभाग की लोगों की छंटनी करेगा। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि योजना का लाभ पात्र व्यक्ति को ही मिलेगा। हिमाचल में सहारा योजना के तहत लाभार्थियों को मिलनी वाली आर्थिक राशि को रोका गया है। जांच पड़ताल होने के बाद इस राशि को जारी किया जाएगा। पात्र लोगों को दस्तावेज मांगे जा रहे हैं।
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