ऐसे ठगी का शिकार हो रहे लोग
डीपफेक ऑडियो के जरिये ठगी करने के लिए साइबर ठग आपके वाइस सैंपल का इस्तेमाल करते हैं। इसमें मशीन लर्निंग जनरेटिव एआई का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी मदद से व्यक्ति को लकर मुसीबत में फंसे होने, बीमार होने या घायल होने का अहसास हो सकता है। इसी का फायदा उठाकर लोगों को अहसास होता है कि उनका अपना किसी मुसीबत में है और उन्हें उनकी मदद करनी चाहिए।
कैसे बनते हैं डीपफेक?
डीपफेक दो नेटवर्क की मदद से बनता है जिनमें एक इनकोडर होता है और दूसरा डीकोडर नेटवर्क होता है। इनकोडर नेटवर्क सोर्स कंटेंट (असली वीडियो) को एनालाइज करता है और फिर डाटा को डीकोडर नेटवर्क को भेजता है। उसके बाद फाइनल आउटपुट निकलता है जो कि हूबहू असली जैसा है लेकिन वास्तव में वह फेक होता है। इसके लिए सिर्फ एक वीडियो या वीडियो की जरूरत होती है। डीपफेक के लिए कई वेबसाइट्स और एप हैं जहां लोग डीपफेक वीडियोज बना रहे हैं।
डीपफेक ऑडियो मशीन लर्निंग जनरेटिव एआई की मदद से साइबर ठगों का धोखाधड़ी करने का नया तरीका है। इससे बचने के लिए लोगों को सलाह दी जाती है कि किसी भी प्रकार के मुसीबत में फंसे होने की कॉल आने पर पहले उसकी पूरी तरह से जांच कर लें। अगर भ्रमित हो रहे हैं तो हेल्पलाइन नंबर 1930 पर भी कॉल कर सकते हैं। हमारे विशेषज्ञ लोगों की मदद के लिए हर समय तैयार रहते हैं। हाल ही में डीपफेक ऑडियो के जरिये एक प्रिंसिपल से धोखाधड़ी का मामला सामने आया है- मोहित चावला, डीआईजी साइबर क्राइम