मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1905 में प्रदेश के कांगड़ा जिले में भूकंप के कारण 20,000 से अधिक लोगों की मृत्यु हुई थी। पिछले वर्ष मानसून में 500 से अधिक लोगों की मौतें हुईं और 10,000 करोड़ की सार्वजनिक और निजी संपत्ति का नुकसान हुआ। केंद्र से किसी प्रकार की वित्तीय सहायता न मिलने के बावजूद राज्य सरकार ने 23,000 प्रभावित परिवारों का पुनर्वास किया और 4,500 करोड़ का आपदा राहत पैकेज लागू किया है। पैकेज के तहत पूरी तरह से नष्ट हो चुके घरों के लिए मुआवजे की राशि 1.30 लाख से बढ़ाकर सात लाख की गई।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय भवन अनुसंधान रूड़की के वैज्ञानिकों की ओर से तैयार प्रकाशन कवच-1 और कवच-2 का विमोचन किया। उन्होंने विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता बच्चों को सम्मानित किया। वहीं, मानसून में समेज, बागीपुल, राजबन में बादल फटने की घटनाओं के दौरान किए गए असाधारण राहत कार्यों के लिए विभिन्न व्यक्तियों को सम्मानित भी किया। मुख्यमंत्री ने आपदा तैयारी और प्रतिक्रिया के लिए युवा स्वयंसेवियों की टास्क फोर्स के लिए जिला कांगड़ा और चंबा को सर्वोत्तम प्रदर्शन करने वाले जिला के पुरस्कार से सम्मानित किया।