आईवी थ्रोंबोलिसिस उपचार की तकनीक में मरीज को इंजेक्शन लगाने पर खून को पतला करने को इंजेक्शन दिए जाने पर नाड़ी में खून का प्रवाह सामान्य किया जा सकता है। स्ट्रोक के मुख्य रूप से दो कारण रहते हैं, जिसमें एक दिमाग की नसों में थक्का जमने पर खून का प्रवाह रुक जाता है, जो शरीर के अंगों को सीधे प्रभावित करता है। इसमें अंग काम करना बंद तक कर देते हैं। वहीं इससे गंभीर ब्रेन स्ट्रोक में दिमाग की नसें फट जाती है, जिससे खून के रिसाव होता है। इससे व्यक्ति बेहोश तक हो जाता है। इसके उपचार की प्रक्रिया अलग रहती है।
स्ट्रोक के ज्यादातर मरीज 61 से अधिक आयु के आईजीएमसी में 2021 से 2024 तक के आंकड़ों के अनुसार भर्ती स्ट्रोक के ज्यादातर मरीज 61 से अधिक आयु के हैं। इनमें पुरुषों का प्रतिशत 64 फीसदी, जबकि महिलाओं का प्रतिशत 36 रहा। स्ट्रोक के कारण धूम्रपान, शराब, हाइपरटेंशन, रक्तचाप और शुगर, चर्बी के बढ़ने, हृदय की लय का बिगड़ना हैं। स्ट्रोक आने पर समय से प्राथमिक उपचार दिए जाने पर नाड़ी बंद होने या नाड़ी के फट जाने के मामले का उपचार भी किया जा सकता है। प्रदेशभर में लोगों को स्ट्रोक को लेकर जागरूक करने को एचपी टेलीस्ट्रोक अभियान चलाया गया है।