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Junga Flying Festival: डर पर जीत हासिल कर 16 साल की शैशी ने भरी 8000 फीट की ऊंचाई से उड़ान

Wed, 29 Oct 2025 01:00 AM IST
अंकेश डोगरा संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

Junga Flying Festival: जुन्गा में चल रहे इंटरनेशनल फ्लाइंग फेस्टिवल में असम की कैलपैंग की 16 साल की शैशी सभी के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं। शैशी ने बताया कि उन्होंने इस खेल में आने के लिए कई चुनौतियां झेलीं। उम्र, अनुभव और डर तीनों को मात देना आसान नहीं था, पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी। 
 
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शैशी - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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जुन्गा में चल रहे इंटरनेशनल फ्लाइंग फेस्टिवल में जहां देश-विदेश के अनुभवी पैराग्लाइडर्स ने अपने कौशल का प्रदर्शन किया, वहीं असम की कैलपैंग की 16 साल की शैशी सभी के लिए प्रेरणा बनकर उभरी हैं। शैशी प्रतियोगिता की सबसे कम उम्र की प्रतिभागी रही, जिन्होंने 8,000 फीट की ऊंचाई से पैराग्लाइडर से उड़ान भरी।

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शैशी ने पैराग्लाइडिंग की शुरुआत वर्ष 2022 में की थी। उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा उनकी मां हैं, जो असम में स्वयं का पैराग्लाइडिंग व्यवसाय चलाती हैं। शैशी ने बताया कि उन्होंने इस खेल में आने के लिए कई चुनौतियां झेलीं। उम्र, अनुभव और डर तीनों को मात देना आसान नहीं था, पर उन्होंने कभी हार नहीं मानी। शैशी ने बताया कि महिलाओं के लिए अलग श्रेणी नहीं होती, हमें ओपन कैटेगरी में ही भाग लेना पड़ता है। हालांकि वह इसे इसे चुनौती ही नहीं, बल्कि अवसर मानती हूं। शैशी ने बताया कि अब तक देश के कई हिस्सों में हुए पैराग्लाइडिंग टूर्नामेंट्स में हिस्सा ले चुकी हैं, जिनमें हिमाचल के बीड़ बिलिंग का अंतरराष्ट्रीय स्तर का आयोजन भी शामिल है। आयोजकों ने शैशी की हिम्मत और कौशल की सराहना की है। शैशी का कहना है कि वह भविष्य में भारत का प्रतिनिधित्व वर्ल्ड पैराग्लाइडिंग चैंपियनशिप में करना चाहती हैं।

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जुन्गा के 58 साल के प्रेम रहे सबसे उम्रदराज पैराग्लाइडर पायलट
जुन्गा की वादियों में पैराशूटों की रंगीन छटा के बीच 58 वर्षीय प्रेम कुमार ठाकुर की उड़ान ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया। प्रेम प्रतियोगिता में सबसे उम्रदराज पैराग्लाइडर पायलट रहे। जुन्गा के मूल निवासी प्रेम अब जर्मनी में रहते हैं, जहां करीब सात साल पहले उन्हें पैराग्लाइडिंग का शौक जागा। आज वह उसी जगह लौटे हैं, जहां कभी उन्होंने पहाड़ियों से बादलों को निहारा था। प्रेम ने मुस्कराते हुए कहा, उम्र कोई रुकावट नहीं होती। शरीर को प्रशिक्षण देते रहें तो हर उम्र उड़ान की होती है। उन्होंने बताया कि पैराग्लाइडिंग जैसा एडवेंचर स्पोर्ट जोखिम से भरा जरूर है, पर असली कुंजी अभ्यास और अनुशासन में है। डर को मन से निकालो फिर हवा खुद रास्ता दिखाती है। प्रेम का मानना है कि हिमाचल में एडवेंचर स्पोर्ट्स का भविष्य बहुत उज्ज्वल है।
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