बंपर पैदावार होने से बढ़ा बागवानों का भरोसा, स्वाद, दाम और भंडारण की सुविधा भी बनी पसंद की वजह
मैहला से चुराह और भरमौर तक बढ़ा कागजी अखरोट का रकबा, लावारिस पशुओं से नुकसान की चिंता भी कम
संवाद न्यूज एजेंसी
चंबा। जिले की बागवानी अब सेब और कीवी की पारंपरिक राह से आगे बढ़ रही है। कागजी अखरोट ने बागवानों के बीच अपनी अलग जगह बनानी शुरू कर दी है।
इस वर्ष कई क्षेत्रों में अखरोट की अच्छी पैदावार ने बागवानों के भरोसे को और मजबूत किया है। यही वजह है कि मैहला, साहो, चुराह, कीड़ी और भरमौर समेत जिले के विभिन्न क्षेत्रों में बागवान अब अखरोट के नए बाग तैयार कर रहे हैं। कई स्थानों पर पेड़ों पर इस बार अखरोट की अच्छी फसल दिखाई दे रही है।
बागवान संजीव कुमार, ललित कुमार, कमलेश कुमार, जगदीश कुमार और प्रदीप कुमार ने बताया कि अखरोट स्वादिष्ट होने के साथ बाजार में अच्छा दाम भी दिलाता है। इसकी खासियत यह भी है कि अन्य कई फसलों की तरह इसे तुरंत बेचने की जरूरत नहीं पड़ती। उचित तरीके से भंडारण करने पर इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
बागवानों के अनुसार बंदर और लावारिस पशु कई फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं। अखरोट में अपेक्षाकृत कम नुकसान होने के कारण दूरदराज के क्षेत्रों में भी इसकी ओर रुझान बढ़ रहा है।
उद्यान विभाग के उपनिदेशक डॉ. प्रमोद शाह ने बताया कि इस वर्ष जिले में कागजी अखरोट की फसल अच्छी रही है। जल्द ही विभाग को उत्पादन संबंधी रिपोर्ट मिलेगी, जिसके बाद अखरोट के उत्पादन और बिक्री के आंकड़े स्पष्ट होंगे।