चंबा। मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) चंबा में पिछले कई सालों से टीबी रोग की ओपीडी बंद पड़ी है। कॉलेज के पास ओपीडी के संचालन के लिए कोई भी टीबी रोग विशेषज्ञ नहीं है। मेडिसन ओपीडी में टीबी रोगी अन्य मरीजों के साथ धक्के खाने को मजबूर हैं। इससे जहां सामान्य मरीजों को संक्रमित होने का खतरा बढ़ रहा है, तो वहीं टीबी रोगियों को भी अपना उपचार करवाने में काफी परेशानी हो रही है।
कुछ वर्ष पहले तक क्षेत्रीय अस्पताल चंबा में नियमित रूप से क्षयरोग की ओपीडी चलती थी। उस समय जो टीबी रोग के विशेषज्ञ थे, वह मौजूदा समय में डिप्टी एमएस का पदभार संभाल रहे हैं। अस्पताल की व्यवस्था देखने के साथ वह भले ही अपने कार्यालय में टीबी रोगियों की जांच करते हैं। मगर रूटीन में अपनी जांच करवाने के लिए टीबी रोगियों को अस्पताल में किसी प्रकार की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
जिला को क्षय मुक्त बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग कई अभियान चला रहा है। मगर जिला के 900 टीबी मरीजों को अपनी रूटीन जांच करवाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। ऐसे में विभाग की तरफ से चलाए जा रहे अभियान धरातल स्तर पर नाकाम होते दिखाई दे रहे हैं। नए टीबी रोगियों को तलाशा जा रहा है, लेकिन उनके इलाज को लेकर अस्पताल में कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की जा रही है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉक्टर पंकज गुप्ता ने बताया कि सरकार को मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञों की कमी के बारे में अवगत करवाया गया है। टीबी रोग विशेषज्ञ की काफी आवश्यकता है। इसको लेकर प्राथमिकता के आधार पर व्यवस्था करवाई जाएगी।