चुवाड़ी (चंबा)। सिविल अस्पताल चुवाड़ी में शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं है। इसकी वजह से 70 पंचायतों की दो लाख आबादी को बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करवाने के लिए मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कहने को तो लाखों की राशि खर्च कर सिविल अस्पताल का तीन मंजिला भवन बनाया गया है। बावजूद इसके अस्पताल में एक अदद शिशु विशेषज्ञ की सेवाएं नहीं मिल रही हैं। ऐसे में बच्चों के बीमार होने की सूरत में अभिभावकों को उन्हें अपने साथ लेकर 30 से 56 किमी का सफर तय कर नूरपुर या पठानकोट का रुख करना पड़ रहा है। इससे अभिभावकों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में शिशु और हड्डी रोग विशेषज्ञों के पद रिक्त पड़े हुए हैं। कई बार शासन-प्रशासन से इसके बारे में अवगत करवाने के बावजूद समस्या का हल नहीं किया जा रहा है। ग्रामीणों विशेषकर महिलाओं को इस बात का मलाल है कि इतने बड़े विस क्षेत्र के अस्पताल में शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं की गई है।
सिविल अस्पताल चुवाड़ी में शिशु रोग विशेषज्ञ का अभाव है। ऐसे में यदि नूरपुर और पठानकोट का मार्ग भूस्खलन से बाधित हो तो वे मजबूरन अपने बच्चों को भटकने को मजबूर हो जाते हैं। इससे उनकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं। उषा देवी, लाहड़ निवासी।
सरकारी अस्पताल में विशेषज्ञ के अभाव में निर्धन परिवारों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। पठानकोट स्थित निजी अस्पताल में प्रतिदिन के हिसाब से दस हजार रुपये वसूले जाते हैं। इसका वहन करना गरीब परिवारों के लिए नामुमकिन हो जाता है। -विकास गौड़, चुवाड़ी निवासी।
विस क्षेत्र भटियात 70 पंचायतों का गढ़ है। यहां कहने के लिए ही सिविल अस्पताल बना हुआ है। अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सक न होने की सूरत में महज दूसरे चिकित्सक से ही बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करवानी पड़ती है। -सुमन लता, चुवाड़ी निवासी।
स्वास्थ्य सेवाओं के लहजे से सिविल अस्पताल चुवाड़ी में अभी तक मूलभूत सुविधाएं नसीब नहीं हो पाई हैं। अस्पताल में हड्डी रोग और शिशु रोग विशेषज्ञों का अभाव है। इससे बीमारी में शिशुओं और दुर्घटनाओं में घायल मरीजों को परेशानी होती है। नरेंद्र ठाकुर, जतरूंड निवासी।
बीएमओ समोट डॉ. श्याम शर्मा ने बताया कि सरकार और विभागीय उच्चाधिकारियों को शिशु रोग विशेषज्ञ की तैनाती के बारे में अवगत करवा दिया गया है।