चंबा। वैश्विक महामारी कोरोना की मार से जैसे-तैसे बाहर निकल रहे कपड़ा व्यापारियों की अब केंद्र सरकार के जीएसटी दर पांच से 12 फीसदी करने का फैसले ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। यह दर एक जनवरी 2022 से लागू होगी। टैक्स की दर बढ़ाने से छोटे कपड़ा व्यापारियों में खासा रोष है। रेडीमेड कपड़ों पर सात फीसदी जीएसटी बढ़ाने से छोटे कपड़ा व्यापारियों की चिंता बढ़ गई है।
बनीखेत के कपड़ा व्यापारियों ने जीएसटी दर बढ़ाने का विरोध किया है। कपड़ा व्यापारियों की मानें तो पहले कोरोना महामारी ने उनका धंधा चौपट कर दिया और अब जीएसटी की दर बढ़ाने से उनका कारोबार पूरी तर ठप हो जाएगा। कहा कि सरकार को इस समय कपड़ा व्यापारियों की मदद के लिए आगे आना चाहिए था, लेकिन यह इससे उलट उन्हें बरबाद करने का काम किया जा रहा है। ऐसे में जीएसटी दर बढ़ाना कदापि तर्कसंगत नहीं है।
जीएसटी बढ़ाना तर्कसंगत नहीं : अमित
बनीखेत के रेडीमेड कपड़ा विक्रेता अमित का कहना है कि कोरोना महामारी के कारण व्यापारी वर्ग पहले से बैंक के कर्जे में डूबा हुआ है। अब रेडीमेड कपड़ों में टैक्स वृद्धि करना तर्कसंगत नहीं है। सरकार को व्यापारियों के हित में फैसला लेना चाहिए।
कारोबारियों की टूटी कमर : प्रशांत
बनीखेत के रेडीमेड विक्रेता प्रशांत शर्मा ने बताया कि जीएसटी बढ़ाने का निर्णय सही नहीं है। उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी के चलते दो साल से व्यापारियों की कमर टूट चुकी है। सरकार की ओर से टैक्स में वृद्धि करने से मध्यवर्गी व्यापारी खत्म हो जाएंगे।
सड़क पर आ जाएंगे व्यापारी : सिद्धार्थ
चुवाड़ी के विक्रेता सिद्धार्थ महाजन ने कहा कि रेडीमेड कपड़ों पर एक हजार से नीचे पांच प्रतिशत जबकि, एक हजार से ऊपर 12 प्रतिशत जीएसटी लिया जा रहा है। नए नियम लागू होने के कारण एक हजार रुपये से नीचे के सामान पर भी 12 फीसदी जीएसटी देना होगा। इससे मध्यवर्गीय कपड़ा विक्रेता पूरी तरह सड़क पर आ जाएंगे।
चौपट हो जाएगा कारोबार : रितेश
चंबा के रेडीमेड विक्रेता रितेश चंद्रा ने कहा कि कोरोना में दुकानदार पहले ही मंदी से जूझ रहे हैं। अब टैक्स बढ़ा दिया है। इसका खामियाजा दुकानदारों को भुगतना पड़ेगा। अब और टैक्स बढ़ने से व्यापार चौपट हो जाएगा।