चंबा। जनजातीय क्षेत्र पांगी और भरमौर में चूल्हे के धुएं और धूम्रपान की वजह से लोग टीबी के मरीज बन रहे हैं।
केंद्र सरकार की ओर से इन दिनों जनजातीय क्षेत्र में टीबी रोगियों का पता लगाने के लिए 100 दिन का स्क्रीनिंग अभियान चलाया गया है। इसमें स्वास्थ्य विभाग की टीमें उन गांवों में पहुंचकर स्क्रीनिंग कर रही हैं जहां पहले से ही टीबी के मरीज पंजीकृत हैं।
अभियान के तहत अभी तक छह नए टीबी मरीज निकल कर सामने आए हैं। अभियान में यह भी पता चला है कि लोग टीबी की चपेट में इसलिए आ रहे हैं क्योंकि उनका रहन-सहन ठीक नहीं है। दूरदराज के इलाकों के लोग आज भी अपने घरों में खाना बनाने में आग जलाकर चूल्हे का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे निकलने वाले धुएं की चपेट में आने से लोग टीबी से पीड़ित हो रहे हैं। इसके अलावा धूम्रपान करने वाले लोगों में भी टीबी के लक्षण पाए जा रहे हैं।
अभियान के 50 दिन पूरे हो चुके हैं। अब तक टीमें 3,500 लोगों की स्क्रीनिंग कर चुकी हैं। इसमें 288 संभावित लक्षणों वाले लोगों की टीबी जांच की गई। इसमें छह लोग टीबी से पीड़ित निकले। अभियान में टीबी संभावित लोगों को ढूंढकर सैंपल लेने का क्रम जारी है। जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हरित पुरी ने बताया कि जनजातीय क्षेत्र पांगी और भरमौर में स्क्रीनिंग के दौरान छह नए टीबी मरीज निकले हैं। टीबी रोग के पीछे मुख्य कारण लकड़ी जलाकर चूल्हे में खाना बनाना और धूम्रपान माना जा रहा है।