टैक्सी के पीछे लटका स्कूली बच्चा।
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बनीखेत (चंबा)। बनीखेत में निजी स्कूलों में पढ़ने वाले कई नौनिहालों की जिंदगियों से खिलवाड़ किया जा रहा है। आलम यह है कि नियमों को ताक पर रखकर निजी गाड़ियों में विद्यार्थियों को ठूंस-ठूंस कर भरा जा रहा है।
यही नहीं गाड़ी की फ्रंट सीट पर जहां चार से पांच विद्यार्थी बैठाए जा रहे हैं तो वहीं पिछली सीट और डिक्की में भी आठ से दस विद्यार्थियों को बैठाया जा रहा है। हैरानी की बात तो यह है कि हाल ही में चंबा के सराहन में सड़क हादसा हुआ है। इसमें निजी स्कूल के दो मासूमों की मौत हुई है जबकि पांच बच्चे घायल हो गए हैं। इससे भी प्रशासन सबक नहीं ले रहा है।
खुद स्टेयिरिंग पर बैठ गया नौनिहाल
शुक्रवार को चालक की अनुपस्थिति में एक नौनिहाल खुद स्टेयरिंग पर बैठ गया और गाड़ी का स्विच दबाने लगा। इससे पता चलता है कि आखिरकार टैक्सियों में स्कूल के नौनिहाल कितने सुरक्षित हैं। हालांकि यह वाहन स्कूल की ओर से अधिकृत नहीं है बल्कि अभिभावकों ने ही अपने स्तर पर विद्यार्थियों की आवाजाही के लिए हायर (किराये पर) किया है। कुलमिलाकर टैक्सियों से विद्यार्थियों की आवाजाही हो रही है जिससे उनकी सुरक्षा दांव पर है।
जिले में पहली से लेकर बारहवीं तक 174 निजी स्कूल हैं। सराहन के समीप हुए सड़क हादसे ने निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की सुरक्षा की पोल खोलकर रख दी है। इस मामले में यह बात सामने आई कि स्कूल की ओर से वाहन अधिकृत नहीं किया गया था। लिहाजा अभिभावक अपनी जिम्मेदारी पर ही निजी वाहनों से बच्चों की आवाजाही करवा रहे हैं।
क्या कहते है उपमंडलाधिकारी
डलहौजी के उपमंडलाधिकारी जगन ठाकुर का कहना है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। कहा कि उपमंडल के तहत सभी स्कूलों से इसके बारे में रिपोर्ट मांगी गई है। कहा कि समय-समय पर गाड़ियों की स्थिति जांचने के लिए निरीक्षण भी किया जाता है।