चंबा। जिले के 180 में से 100 स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर ताले हैं। इसकी वजह से गर्भवतियों और छोटे बच्चों का टीकाकरण प्रभावित हो रहा है। छोटे बच्चों को जन्म के बाद हेपेटाइटिस बी, पोलियो और निमोनिया से बचाने के लिए टीके लगाए जाते हैं। टीकाकरण की व्यवस्था स्वास्थ्य उपकेंद्रों में रहती है।
अधिकतर स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर ताले लटके होने से ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण अभियान प्रभावित हो रहा है। इससे कई बच्चे बीमारी की चपेट में भी आ रहे हैं। इसके प्रमाण हाल ही में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों में चल रही बच्चों की स्वास्थ्य जांच में सामने आए हैं। कई बच्चे चलने में असमर्थ तो कई बच्चे कई बीमारियों से ग्रसित मिले। इसका कारण ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद रहना बताया जा रहा है।
चंबा जिले में एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता के कंधों पर चार से पांच स्वास्थ्य उपकेंद्रों का जिम्मा है। विभाग के पास स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की भारी कमी है। यही कारण है कि अधिकतर स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद हैं। विभाग इसके बारे में कई बार सरकार को भी अवगत करवा चुका है। अभी तक सरकार ने इस दिशा में कदम नहीं उठाए हैं।
इसके चलते अधिकतर स्वास्थ्य उपकेंद्र बंद हैं। ग्रामीण क्षेत्रों के लोग और पंचायत प्रतिनिधि इन उपकेंद्रों को खोलने की मांग कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी डॉक्टर करण हितैषी ने बताया कि यह बात सही है कि जिले में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की कमी है। बच्चों और महिलाओं का टीकाकरण प्रभावित न हो, इसके पुख्ता प्रबंध किए हैं। स्वास्थ्य कार्यकर्ता सप्ताह में तय तिथि के अनुसार उपकेंद्रों में टीकाकरण कर रहे हैं।