तीसा में बैठक के बाद मिड डे मील वर्कर यूनियन के पदाधिकारी व सदस्य।
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तीसा (चंबा)। मिड-डे मील वर्करों को सरकार महंगाई के दौर में 86 रुपये दिहाड़ी देकर उनके साथ मजाक कर रही है। महीना भर स्कूल में सेवाएं देने के बाद उन्हें वेतन के रूप में 2600 रुपये दिए जा रहे हैं। इतने कम पैसों में परिवार चलाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। अपनी समस्या को लेकर मिड-डे मील वर्करों ने वीरवार को नकरोड़ में बैठक की। इसमें सीटू के जिला अध्यक्ष विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक की अध्यक्षता यूनियन अध्यक्ष होशियार सिंह ने की।
सीटू जिला अध्यक्ष नरेंद्र कुमार ने कहा कि सरकार मिड-डे मील वर्कर की अनदेखी कर रही है। जो वेतन सरकार उन्हें दे रही है, वह न्यूनतम वेतन से भी बहुत कम है। जबकि, सरकार कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने के दावे हमेशा करती है। कहा कि मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को 200 रुपये दिहाड़ी मिलती है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि मिड-डे मील वर्करों को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए। कहा कि यूनियन 23 और 24 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल में भाग लेगी और प्रदर्शन करेगी। यूनियन ने सरकार को चेताया है कि अगर सरकार इस तरह से ही अनदेखी करती रहेगी तो इसका खामियाजा सरकार को भुगतना पड़ेगा।
बैठक में तीसा यूनियन के सचिव हंसराज, नारो देवी, युपावंती, अब्दुल फारुख, मजीद, कर्मचंद, करतार सिंह, चंद्रमणि, पानो देवी, तुलसी, कांता देवी, नसीमा, भीखो, रुखी देवी, नैनी, हुसैन, ममता, तिमरू आदि शामिल रहे।