Medicine department is handling four doctors instead of fourteen
चंबा। पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज का मेडिसिन विभाग चार डॉक्टरों के सहारे चलाया जा रहा है। जबकि, इस विभाग में 14 डॉक्टर होने चाहिए। लेकिन, सरकार चंबा में डॉक्टरों की तैनाती करने के लिए गंभीर नहीं दिख रही है। मेडिकल कॉलेज की अन्य ओपीडी की अपेक्षा सबसे ज्यादा भीड़ मेडिसिन की ओपीडी में रहती है। चार डॉक्टरों को कोविड अस्पताल भी चलाना पड़ रहा है। कोरोना मरीजों की देखभाल के लिए एक डॉक्टर 24 घंटे वहां मौजूद रहता है। कई बार केस बढ़ने पर दो से तीन डॉक्टर कोविड मरीजों की देखरेख में व्यस्त हो जाते हैं। ऐसी परिस्थिति में ओपीडी चलाना मुश्किल हो जाता है।
मेडिकल कॉलेज में मेडिसिन की दो ओपीडी हैं, जबकि जिले के अन्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में मेडिसन विशेषज्ञ नहीं हैं। इसके चलते इन विशेषज्ञों से अपनी बीमारी का इलाज करवाने के लिए मरीजों को चंबा का रुख करना पड़ता है। जिले की पौने छह लाख की आबादी मेडिकल कॉलेज पर ही निर्भर करती है।
ऐसा नहीं है कि सरकार को चंबा में डॉक्टरों की कमी के बारे में पता नहीं है बल्कि मेडिकल कॉलेज प्रबंधन कई बार सरकार को लिखित रूप से डॉक्टरों की कमी से अवगत करवा चुका है। हर बार सरकार आश्वासन देती है कि जल्द चंबा में डॉक्टरों के रिक्त पद भर दिए जाएंगे। लेकिन, सरकार पिछले चार सालों में खाली पदों को नहीं भर पाई है।
एमसीआई (मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया) के निरीक्षण के दौरान टांडा और शिमला से डॉक्टर बुलाकर औपचारिकताएं पूरी कर दी जाती हैं। टीम के जाने के साथ ही ये डॉक्टर भी अपने मूल स्थानों पर चले जाते हैं। यह सिलसिला पिछले चार सालों से चला हुआ है। यही कारण है कि चंबा में डॉक्टरों के रिक्त पद नहीं भरे जा रहे हैं।
कार्यकारी प्राचार्य एवं मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉक्टर पंकज गुप्ता ने बताया कि यह बात सही है कि मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों की भारी कमी है। इसके बारे में सरकार को अवगत करवाया जा चुका है। चार डॉक्टरों को मेडिसिन विभाग के साथ कोविड व्यवस्था संभालना मुश्किल हो रहा है। सरकार को जल्द डॉक्टरों की तैनाती करनी चाहिए।