25 अगस्त से शुरू होने वाली मणिमहेश यात्रा के दौरान अगर पिछले साल जैसी भारी बारिश और भूस्खलन की स्थिति बनती है तो प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करेगा। इसके लिए प्लान-बी तैयार कर लिया गया है। वैकल्पिक रास्ता सामान्य मार्ग से करीब एक किलोमीटर लंबा है, लेकिन प्रशासन के अनुसार यह सुरक्षित है। भारी बारिश या भूस्खलन की स्थिति में ही इस मार्ग को श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए खोला जाएगा।
सामान्य परिस्थितियों में श्रद्धालु पारंपरिक मार्ग से ही मणिमहेश के लिए आवाजाही करेंगे। वैकल्पिक मार्ग वन विभाग के क्षेत्र से होकर गुजरता है। यह हड़सर से घुई नाला, तोस गोठ, यमकुंड, दुनाली और धन्छौ झरने से होते हुए सीधे गौरीकुंड हेलीपैड के पास निकलता है।
पिछले साल के नुकसान को देखते हुए तैयारी
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी विकास शर्मा ने बताया कि इस बार मणिमहेश यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं और मार्गों की स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर रहेगी। पिछले साल आपदा के दौरान दुनाली के पास सामान्य यात्रा मार्ग को काफी नुकसान पहुंचा था। हालांकि वर्तमान में श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए रास्ता तैयार कर दिया गया है, लेकिन यात्रा के दौरान यदि बारिश या भूस्खलन के कारण वहां दोबारा हालात खराब होते हैं तो वैकल्पिक मार्ग को सक्रिय कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रशासन इस बार किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी कर रहा है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या और अलग-अलग पड़ावों पर उनकी स्थिति पर भी नजर रखी जाएगी।