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Manimahesh Yatra 2026 : भारी बारिश हुई तो बदल जाएगा मणिमहेश यात्रा का रूट, प्रशासन ने तैयार किया प्लान-बी

Mon, 10 Aug 2026 09:53 AM IST
Ankesh Dogra रंजीत शर्मा, (भरमौर) चंबा।

सार

मणिमहेश यात्रा 25 अगस्त से शुरू होने जा रही है। पिछले साल जैसी भारी बारिश और भूस्खलन की स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने प्लान-B तैयार किया है। सामान्य मार्ग प्रभावित होने पर हड़सर से घुई नाला, तोस गोठ, यमकुंड, दुनाली और धन्छौ झरने होते हुए गौरीकुंड हेलीपैड तक वैकल्पिक रास्ते से श्रद्धालुओं को भेजा जाएगा। यात्रा के दौरान ड्रोन से निगरानी होगी और 5,000 श्रद्धालुओं का स्लॉट रखा जाएगा।
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मणिमहेश यात्रा 2026 - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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25 अगस्त से शुरू होने वाली मणिमहेश यात्रा के दौरान अगर पिछले साल जैसी भारी बारिश और भूस्खलन की स्थिति बनती है तो प्रशासन श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल करेगा। इसके लिए प्लान-बी तैयार कर लिया गया है। वैकल्पिक रास्ता सामान्य मार्ग से करीब एक किलोमीटर लंबा है, लेकिन प्रशासन के अनुसार यह सुरक्षित है। भारी बारिश या भूस्खलन की स्थिति में ही इस मार्ग को श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए खोला जाएगा।

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सामान्य परिस्थितियों में श्रद्धालु पारंपरिक मार्ग से ही मणिमहेश के लिए आवाजाही करेंगे। वैकल्पिक मार्ग वन विभाग के क्षेत्र से होकर गुजरता है। यह हड़सर से घुई नाला, तोस गोठ, यमकुंड, दुनाली और धन्छौ झरने से होते हुए सीधे गौरीकुंड हेलीपैड के पास निकलता है।

पिछले साल के नुकसान को देखते हुए तैयारी
अतिरिक्त जिला दंडाधिकारी विकास शर्मा ने बताया कि इस बार मणिमहेश यात्रा के दौरान व्यवस्थाओं और मार्गों की स्थिति पर प्रशासन की लगातार नजर रहेगी। पिछले साल आपदा के दौरान दुनाली के पास सामान्य यात्रा मार्ग को काफी नुकसान पहुंचा था। हालांकि वर्तमान में श्रद्धालुओं की आवाजाही के लिए रास्ता तैयार कर दिया गया है, लेकिन यात्रा के दौरान यदि बारिश या भूस्खलन के कारण वहां दोबारा हालात खराब होते हैं तो वैकल्पिक मार्ग को सक्रिय कर दिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि प्रशासन इस बार किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारी कर रहा है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या और अलग-अलग पड़ावों पर उनकी स्थिति पर भी नजर रखी जाएगी।

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ड्रोन से होगी श्रद्धालुओं की निगरानी
यात्रा के दौरान ड्रोन की मदद से विभिन्न पड़ावों की निगरानी की जाएगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस स्थान पर कितने श्रद्धालु मौजूद हैं या कहीं श्रद्धालुओं के फंसने जैसी स्थिति तो नहीं बनी है। आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्य को तेज करने के लिए यह निगरानी व्यवस्था महत्वपूर्ण रहेगी।

बिना पंजीकरण नहीं जा सकेंगे श्रद्धालु
प्रशासन ने इस बार यात्रा में बिना पंजीकरण श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक रखी है। यात्रा के लिए 5,000 श्रद्धालुओं का स्लॉट निर्धारित किया जाएगा। पंजीकरण व्यवस्था की निगरानी के लिए हड़सर में टीमें तैनात रहेंगी। प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। मौसम और रास्ते की स्थिति को देखते हुए जरूरत पड़ने पर यात्रा मार्ग में बदलाव या अन्य आवश्यक निर्णय लिए जाएंगे।
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