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आंखों के सामने राख हो गई जिंदगी भर की जमापूंजी

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छत्रराड़ी में आग लगने के बाद मकान से उठता धुआं। - फोटो : Chamba
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भरमौर (चंबा)। अपने आशियाने को जलता देख अस्सी वर्षीय माया देवी के आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। जिंदगी भर की जमापूंजी आंखों के सामने जलकर राख हो गई। वहीं, दोपहर बाद उसकी बहू कैलासो और पोता रोते हुए मौके पर पहुंचे। बहू को अपनी बूढ़ी सास की चिंता सता रही थी, जो घटना के समय मकान के अंदर थी। माया को देख कैलासो की जान में जान आई। मौके पर मौजूद इस घटना को देखकर हर कोई भावुक हो गया। कु
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छ देर बाद राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला कूंर से पढ़ाई कर लौटी माया देवी की पोती प्रिया को उसका घर जलने की सूचना मिली तो वे फफक-फफक कर रोने लगी। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसका घर अब राख के ढेर में तबदील हो चुका है।
वहीं, दूसरी ओर गलथन में आग की लपटों से घिरे मकान को आग बुझाना अग्निशमन जवानों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं रहा। गांव के लिए सड़क न होने से अग्निशमन विभाग को आग बुझाने में खासी मुश्किल हुई। सड़क से 600 मीटर तक जैसे-तैसे जवानों ने पाइप लाइन बिछाकर पानी घटनास्थल पर पहुंचाया। उसके बाद ही आग पर काबू पाने का काम शुरू हो पाया। ऐसे में ग्रामीण यह कहते हुए भी सुने गए कि काश गांव के लिए कच्ची या पक्की सड़क होती तो पूर्ण चंद का घरौंदा आग की भेंट चढ़ने से बच जाता।
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अग्निशमन विभाग चंबा से घटनास्थल पर पहुंचे लीडिंग फायरमैन चैन लाल ने बताया कि सड़क से प्रभावित के मकान तक उन्हें 30 मीटर की नौ पाइप जोड़कर जैसे-तैसे कर पानी पहुंचाना पड़ा। इसके अलावा खड़ामुख और एनएचपीसी की ओर से मौके पर पहुंची अग्निशमन विभाग की गाड़ियों से पानी पाइपों के जरिये मौके पर पहुंचाकर आग बुझाई गई।
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