लाहडू उप-प्रधान यूनियन भट्टियात की त्रैमासिक बैठक के दौरान मौजूद पदाधिकारी व सदस्य।
- फोटो : Chamba
चुवाड़ी (चंबा)। पंचायत प्रतिनिधियों ने उन्हें पहचान पत्र जारी करने की मांग एक स्वर में उठाई है। कहा कि इससे जिला और ब्लॉक स्तर के कार्यालयों में किसी कार्य के लिए जाने पर उनकी पहचान होगी। शुक्रवार को उपप्रधान यूनियन भटियात की त्रैमासिक बैठक लाहडू में हुई। इसकी अध्यक्षता यूनियन के प्रधान जैसीराम ने की। इसमें विभिन्न पंचायतों के उपप्रधानों ने पंचायत स्तर के मुद्दों पर चर्चा की। कहा कि प्रधानों और उपप्रधानों के मानदेय में इतनी भिन्नता नहीं होनी चाहिए। कहा कि इससे पूर्व अंतर कम था।
लोकतंत्र में जो भी प्रतिनिधि चुन कर आता है, वह सेवा भावना से आता है। वह किसी मानदेय या वेतन का मोहताज नहीं होता है। बावजूद इसके अगर प्रांत में नीति निर्धारित करने वालों ने मानक की व्यवस्था की है तो कम से कम इसके लिए कोई मानक तय किया होगा। कहा कि पंचायतों में प्रधान, उपप्रधान एक समान चुनकर आते हैं। दोनों की चयनित प्रक्रिया एक समान है। बावजूद इसके प्रधान और उपप्रधान के मानदेय में इतना अंतर रखा गया है। कहा कि पंचायतीराज तंत्र में उपप्रधानों को दी गई शक्तियां पर्याप्त नहीं हैं, जिससे उपप्रधान अपने आप को अपेक्षित महसूस करते हैं। इसका मुख्य कारण उपप्रधानों को वित्तीय शक्तियों से वंचित रखना है।
पंचायतों में कुछ मदों के विकास कार्यों के क्रियान्वयन की वित्तीय शक्तियां उपप्रधानों को भी मिलनी चाहिए, जिससे पंचायत में शक्ति संतुलन बना रहे। उन्होंने 15वें वित्तीय आयोग की पूरी राशि पंचायतों को देने और जिला परिषद और बीडीसी सदस्यों को अलग से राशि देने की मांग की है। कहा कि आज कोई भी निपुण श्रमिक मात्र 203 रुपये में अपनी सेवाएं विकास कार्यों में देने में असमर्थ है। इसलिए मनरेगा में कुछेक निपुण श्रमिकों की सेवा लेने के लिए स्थानीय दर अनुसार श्रम राशि तय की जाए, जिससे कार्यों में गुणवत्ता आ सके। बैठक में ग्राम पंचायत छलाड़ा के उपप्रधान नरोत्तम कुमार, ग्राम पंचायत सिहुंता के उपप्रधान शमशेर सिंह, ग्राम पंचायत परछियाड़ा के उपप्रधान ज्ञान चंद सैनी और ग्राम पंचायत गरनोटा के उपप्रधान अनु कुमार मौजूद रहे।