Health checkup of young children not done for two years
चंबा। केंद्र और प्रदेश सरकार जहां बच्चों को कोविड संक्रमण से बचाने की योजना बना रही है वहीं, स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में बीमार बच्चों का पता लगाने वाला राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम दो सालों से बंद पड़ा है। कार्यक्रम के तहत बीमार बच्चों को मुफ्त इलाज मुहैया करवाने वाले येलो रेफर कार्ड सीएमओ कार्यालय में धूल फांक रहे हैं।
कार्यक्रम के तहत मोबाइल स्वास्थ्य टीमें स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करती हैं। इसमें यदि कोई बच्चा गंभीर रूप से बीमार पाया जाता है तो उसे येलो रेफर कार्ड दिया जाता है। इस कार्ड पर बच्चे की पूरी बीमारी का इलाज मुफ्त होता है। उपचार के लिए चाहे बड़े से बड़ा ऑपरेशन भी करना पड़े तो उसके लिए अभिभावक को किसी प्रकार की धनराशि खर्च नहीं करनी पड़ती है। लेकिन, जिले में कार्यक्रम के तहत दो सालों से किसी बच्चे के स्वास्थ्य की जांच नहीं हो पाई है। कार्यक्रम के तहत चंबा जिले में 11 मोबाइल हेल्थ टीमें गठित की गई थीं जो रोजाना ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करती थी लेकिन, मौजूदा समय में इन स्वास्थ्य टीमों की ड्यूटी कोरोना संक्रमण की रोकथाम में लगाई गई है। इसके चलते ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच अधर में लटक गई है।
आधा दर्जन बच्चों का हुआ दिल की बीमारी का इलाज
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत के तहत जिले में आधा दर्जन ऐसे बच्चों का इलाज हुआ है, जो दिल की बीमारी से ग्रसित थे। उनका परिवार बीमारी का इलाज करवाने में असमर्थ था। ऐसे बच्चों का इलाज येलो रेफर कार्ड के जरिये टांडा और आईजीएमसी शिमला में मुफ्त हुआ। इससे बच्चों को नई जिंदगी प्रदान हुई। वहीं, मामूली बीमारी से ग्रसित बच्चों को मौके पर दवाइयां आवंटित की गईं।
दोबारा शुरू किया जाएगा कार्यक्रम : डॉ. जालम
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर जालम सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण की वजह से कार्यक्रम को स्थगित किया गया था। अभियान में सेवाएं देने वाले सभी कर्मचारी मौजूदा समय में कोविड में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र भी बंद पड़े थे, जिन्हें सरकार ने खोलने की अनुमति अभी दी है। इस कार्यक्रम को दोबारा शुरू किया जाएगा।