चंबा। कोरोना महामारी के दौरान भले ही स्थिति विकट बनी हुई हो, लेकिन इसके कुछ सार्थक परिणाम भी निकले हैं। कोरोना काल में शिक्षण संस्थानों में नए साधन विकसित हुए हैं। बच्चों को पढ़ाने के लिए प्राध्यापकों को नई तकनीक भी मिली है। बात जिले के सबसे बड़े संस्थान राजकीय महाविद्यालय चंबा की करें तो यहां आईसीटी टूल्स में काफी बढ़ोतरी हुई है। ऑनलाइन साधनों में इजाफा हुआ है। विद्यार्थियों की सहूलियत के लिए कॉलेज प्रशासन की ओर से असाइनमेंट जमा करवाने के लिए गूगल क्लास रूम की स्थापना की गई। इसके अलावा पूरा कैंपस वाई-फाई नेटवर्क से जुड़ गया। पहले जहां कॉलेज में दो स्मार्ट क्लास रूम थे तो वहीं, इन दो सालों में अब सभी क्लास रूम स्मार्ट हैं। हर क्लास रूम में प्रोजेक्टर की व्यवस्था है। पूरा कैंपस सीसीटीवी की निगरानी में है। करीब 64 कैमरे स्थापित किए गए हैं। कॉलेज में इंट्रेक्टिव बोर्ड एलईडी भी स्थापित की गई है।
यू ट्यूब चैनल में अपलोड किया मैटीरियल
चंबा कॉलेज में चार हजार से अधिक विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। कोरोना महामारी के चलते प्राध्यापकों ने विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाई करवाई। विद्यार्थियों की सहूलियत के लिए प्राध्यापकों ने अपने यू-ट्यूब चैनल में भी स्टडी मैटेरियल अपलोड किया। कॉलेज में वर्चुअल रूम स्थापित किया गया। इससे अब प्राध्यापक एक जगह बैठकर अन्य विद्यार्थियों से एक ही समय में जुड़ सकते हैं।
क्या कहते हैं प्राचार्य
कॉलेज प्राचार्य डॉ. शिवदयाल शर्मा ने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान कॉलेज में ऑनलाइन पढ़ाई के साधन विकसित हुए हैं। हरेक क्लास रूम को स्मार्ट बनाया गया और प्रोजेक्टर स्थापित हुए। विद्यार्थियों की सहूलियत के लिए गूगल क्लास रूम बनाया गया। प्राध्यापकों के लिए वर्चुअल रूम बनाया गया। यहां बच्चों को आसानी से प्राध्यापकों ने पढ़ाई करवाई।
शंकाएं दूर करने को दिए नंबर : पल्लवी
बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा पल्लवी कुमारी का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई हुई। प्राध्यापक ऑनलाइन माध्यम से जुड़े रहे। साथ ही किसी भी शंका के लिए नंबर भी जारी किए।
गूगल क्लास रूम से मिली सुविधा : ममता
बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा ममता कुमारी का कहना है कि कोरोना महामारी के बाद कॉलेज में ऑनलाइन संसाधनों में बढ़ोतरी हुई है। बताया कि गूगल क्लास रूम की मदद से असाइनमेंट जमा करवाने में दिक्कत नहीं हुई।
पढ़ाई नहीं हुई प्रभावित : साहिल
बीए प्रथम वर्ष के छात्र साहिल वशिष्ठ का कहना है कि कोरोना महामारी का शुरुआती समय काफी विकट था, लेकिन इस अवधि में अध्यापकों ने हरसंभव सहयोग किया और बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होने दी।
नई तकनीक से की पढ़ाई : चंदन
बीए प्रथम वर्ष के छात्र चंदन मिन्हास का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान बच्चों को नई तकनीक से भी रूबरू होने का मौका मिला। इससे पहले ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हुआ करती थी, लेकिन पढ़ाई की इस नई तकनीक से भी वाकिफ हुए।