चंबा। जिले के केमिस्टों को टीबी की दवाई बेचते समय मरीज और दवाई का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने जिले के सभी केमिस्टों को निर्देश जारी कर दिए हैं। जिले में 200 से अधिक दवाईयों की दुकानें हैं। यहां पर स्वास्थ्य विभाग टीबी दवाइयों का रिकॉर्ड समय-समय पर चेक करेगा। अगर किसी केमिस्ट ने दवाई के रिकॉर्ड में गड़बड़ी पाई गई तो उसका लाइसेंस भी रद्द किया जा सकता है। इसके जरिये सरकार टीबी के मरीजों का सहीं आंकड़ा जुटाना चाहती है।
सरकार ने प्रदेश में टीबी के मरीजों का आंकड़ा जांचने के लिए सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर एक सर्वे करवाया है। इसमें सरकारी आंकड़े में टीबी के मरीज का आंकड़ा कम पाया गया। जबकि निजी संस्था के किए सर्वेे में टीबी की मरीजों की संख्या ज्यादा बताई गई। ऐसा इसलिए हुआ, क्योंकि टीबी के मरीज अपनी पहचान बचाने के चक्कर में निजी केमिस्टों से टीबी की दवाई ले रहे हैं। केमिस्टों के पास भी टीबी की दवाई खरीदने वाले मरीजों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। इसको लेकर सरकार ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए हैं कि बिना रिकॉर्ड टीबी की दवाई बेचने वाले केमिस्टों पर कार्रवाई की जाए। इसको लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सभी केमिस्टों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वह टीबी की दवाई देते समय मरीज और दवाई का पूरा रिकॉर्ड रखें। केमिस्ट को एक माह के बाद अपनी रिपोर्ट संबंधित ड्रग इंस्पेक्टर को देनी होगी। जो केमिस्ट टीबी की दवाई नहीं बेच रहे हैं उन्हें भी लिखित रूप पर विभाग को इसकी सूचना देनी होगी।
टीबी की दवाई और मरीज का रिकॉर्ड रखने के दिए निर्देश : ड्रग इंस्पेक्टर
ड्रग इंस्पेक्टर नरेंद्र ठाकुर ने बताया कि जिला के केमिस्टों को निर्देश जारी किए गए हैं कि वह टीबी की दवाई बेचते समय मरीज और दवाई का पूरा रिकॉर्ड रखें। इसे महीने बाद रूटीन में चेक किया जाएगा। अवहेलना करने वाले केमिस्टों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।