अमर उजाला ब्यूरो
चांजू (चंबा)। रावमापा बघेईगढ़ में अध्यापकों की कमी को लेकर छात्रों की हड़ताल खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। आठ दिन बीतने बाद भी बच्चे स्कूल में पढ़ने नहीं पहुंचे। बच्चों का कहना है कि स्कूल में बिना अध्यापक उनका भविष्य चौपट हो रहा है। स्कूल में तैनात अध्यापक खाली क्लास रूम में समय बीता कर वापस घरों को लौटने को मजबूर हैं। कक्षा में बैठने के लिए कोई छात्र नहीं पहुंच रहा है। छात्र अध्यापकों की कमी को लेकर उग्र आंदोलन करने की तैयारी में हैं। बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए अभिभावक भी आंदोलन में शामिल होने पर विचार कर रहे हैं। ऐसा हुआ तो प्रशासन और विभाग को आंदोलन को शांत करवाने में काफी परेशानी होगी। छात्रों और अभिभावकों ने सरकार और शिक्षा विभाग से अध्यापकों के पद भरने की मांग की है।
छात्र चमन लाल ने बताया कि पिछले वर्ष स्कूल के सभी छात्रों ने हड़ताल करके स्कूल का दर्जा बढ़वाया। इससे पहले छात्रों को दसवीं के बाद पढ़ाई करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। स्कूल का दर्जा बढ़ने के बाद अध्यापकों की कमी हो गई है। जब तक अध्यापकों की कमी को पूरा नहीं किया जाएगा वे स्कूल नहीं आएंगे।
सुमित कुमार ने बताया कि सरकार और शिक्षा विभाग बेहतर शिक्षा प्रदान करने के बड़ी-बड़ी घोषणाएं करते हैं लेकिन धरातल पर शिक्षा का हाल काफी बुरा है। स्कूल में अध्यापक नहीं है। इसकी वजह से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
लक्ष्य ने बताया कि बघेईगढ़ स्कूल में अध्यापकों की कमी दूर करने के लिए स्कूल प्रबंधन समिति सहित छात्रों ने कई बार प्रशासन और अभिभावकों को अवगत करवाया। उसके बाद भी शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो पाई है, जो सरकार और विभाग की शिक्षा के प्रति उदासीनता को बयां करती है।
साहिल कुमार ने बताया कि बघेईगढ़ स्कूल में जब तक शिक्षकों की कमी पूरी नहीं हो जाती, तब तक कोई भी छात्र स्कूल में नहीं आएगा। कुछेक दिनों के बाद छात्र सड़क पर धरने में बैठ जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
आस्था कुमारी ने बताया कि छात्र-छात्राएं पढ़ने के लिए दूर दराज के क्षेत्रों से आते हैं लेकिन स्कूल में अध्यापक नहीं होने से उनकी पढ़ाई अच्छे तरीके से नहीं हो पाती। इसकी वजह से छात्र स्पर्धा के दौर में पिछड़ रहे हैं।
शालिनी ने बताया कि बघेईगढ़ स्कूल में आधारभूत शिक्षा सही तरीके से न मिल पाने की वजह से उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है। बार-बार छात्र एक ही मांग कर रहे हैं कि स्कूल में अध्यापक तैनात किए जाएं लेकिन सरकार और विभाग इसमें कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
यशोदा ने बताया कि सरकार ने शीघ्र ही बघेईगढ़ स्कूल में अध्यापकों को तैनात नहीं किया तो सभी छात्र स्कूल के बाहर भूख हड़ताल और सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाएंगे। इसकी जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
रजनी ने बताया कि स्कूल में जाकर बिना शिक्षक उनकी पढ़ाई नहीं हो रही है। इसकी वजह से छात्र हड़ताल पर गए हैं। सरकार और विभाग की उदासीनता को देखते हुए छात्रों को अब कड़ा रुख अपनाना होगा। इसके लिए छात्र अभिभावकों और स्थानीय जनता का सहयोग लेंगे।
संगीता ने बताया कि बघेईगढ़ स्कूल में लंबे समय से शिक्षकों की कमी चल रही है। इसके बारे में कई बार विभाग को अवगत करवाया गया लेकिन अभी तक शिक्षकों की कमी दूर नहीं हो पाई है। इसके विरोध में छात्र हड़ताल पर गए हैं।