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पानी नहीं मिला तो बाल्टियों में बर्फ भरकर बुझाई मंदिर की आग

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अमर उजाला ब्यूरो

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चंबा। पांगी में ऐतिहासिक हुनसुन नाग मंदिर में देर रात आग से बचाने के लिए जब क्षेत्र के लोगों को पानी नहीं मिला तो उन्होंने बाल्टियों में बर्फ भर-भरकर आग बुझाने की कोशिश की। इसके लिए लोगों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। बर्फ को लाने के लिए लोग दौड़ लगाते दिखे। क्योंकि मंदिर के आसपास न तो पानी था और न ही बर्फ बची थी। आग की चपेट में आने के बाद जब मंदिर की छत नीचे गिरी तो लोगों ने उसके ऊपर लोगों ने बर्फ डालना शुरू कर दिया। इससे आग के शोले बुझ गए। आग की लपटें कम होते ही फौरन जान जोखिम में डालकर कुछ लोग मंदिर में दाखिल हुए और भीतर रखी नाग देवता की मूर्ति को सुरक्षित बाहर निकाला।

स्थानीय लोगों के मुताबिक मंदिर करीब 500 वर्ष से भी अधिक पुराना है। इस मंदिर के साथ पांगी के सभी लोगों की आस्था जुड़ी हुई है। जैसे ही लोगों को मंदिर जलने की सूचना मिली। पांगी घाटी में शोक की लहर दौड़ गई। हर कोई मंदिर जलने से दुखी था। लोगों की ऐसी भी मान्यता है कि मंदिर को नुकसान होने से शायद सर्दियों में पांगीवासियों को नुकसान न उठाना पड़े। बुधवार सुबह के समय प्रजामंडल ने मंदिर को ढकने के लिए लोहे की चादरें रखीं। मंदिर के जीर्णोद्घार का कार्य सर्दियों के बाद ही शुरू हो सकेगा।
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आगामी दिनों में पांगी में भारी बर्फबारी होती है। ऐसे में वहां पर मंदिर निर्माण नहीं हो पाएगा। बुुधवार को पंचायत प्रतिनिधियों और प्रजा मंडल ने स्थानीय प्रशासन से बैठक की। स्थानीय प्रशासन ने प्रजामंडल को मंदिर के जीर्णोद्घार के लिए पांच लाख की राशि देने का आश्वासन दिया है। इसके अलावा वन विभाग ने भी मंदिर निर्माण में लकड़ी उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया गया। अब पंचायत और प्रजामंडल मिलकर एक बैठक करेगा। इसी बैठक में तय किया जाएगा कि मंदिर का निर्माण कब शुरू किया जाए।
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जब मंदिर का निर्माण शुरू होगा, तो उसके कारीगर और बजंतरी मंदिर से कहीं भी नहीं जा पाएंगे। उन्हें दिन रात मंदिर में कार्य करना होगा। इसलिए प्रजा मंडल ही तय करेगा कि मंदिर निर्माण का कार्य गर्मियों में शुरू किया जाएगा, या अभी। सर्दियों में आयोजित होने वाला चियज मेला भी इस बार शायद ही मनाया जाए। इस मेले के शुभारंभ पर होने वाली विशेष पूजा उपरोक्त मंदिर के भीतर होती है। ऐसे में बिना पूजा के मेले का आयोजन संभव नहीं है। किलाड़ पंचायत प्रधान सुनीता शर्मा ने बताया कि मंदिर जलने से सभी घाटी वासी दुखी हैं। हर कोई चाहता है कि मंदिर जल्द बने। मगर मंदिर बनाने को लेकर प्रजामंडल ही निर्णय लेगा। उनके निर्णय अनुसार ही मंदिर निर्माण शुरू होगा।

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